४४ लाख करोड के थोरियम की लूट के हिसाब ने दिमाग झन्ना दिया....कांग्रेस ने भारत के थोरियम भण्डार में से बड़ा हिस्सा अमेरिका भिजवा दिया जिससे देश को कम से कम ४४ लाख करोड रुपये मिल सकते थे, वैसे तो बाज़ार में इसकी कीमत २४५ लाख करोड रुपये होगी...इसके लिए क्या बीजेपी जिम्मेदार है...इस देश का भला हो ही नहीं सकता है....
दोस्तो यदि आपको याद है मैंने एक पोस्ट भेजी थी की अमेरिका अपनी कारों को थोरियम से चलाने के उद्यत है और थोरियम से ऊर्जा लेने की तकनीक बहुत निरापद और आसान है लेकिन "अभावो की नीति " के चलते कांग्रेस ने भारत में थोरियम पर चल रहे अनुसंधान को २००५ में बंद करवा दिया और अमेरिका से परमाणु समझौता करके उसका महगा यूरेनियम कचरा खरीदकर एक ऐसे परमाणु बिजली घर की सथापना करवा रहे है जिसका अभी तक परीक्षण ही नहीं हुआ है..
दूसरी ओर भारत की दक्षिणी समुद्री तटो में दबी थोरियम की अपार संपदा को अमेरिका को बिना किसी रोक टोक के भेज डाला, असल में सेतु समुद्रम परियोजना इन तटो को खोदकर अमेरिका भेजने की एक बहुत बड़ा धोखा था जिसे डॉ.सुब्रमनियन स्वामी और और उनकी "ए सी ए सी आई" टीम ने जनता को बता डाला. बहुत बड़ी बिदमबना है की बहुसंख्यक हिन्दुओ के देश भारत में उन्ही के पूज्य "श्री राम " भगवान को झूठा बताने के लिए कांग्रेस की सरकार ने शपथ पत्र दिया सिर्फ इसलिए की थोरियम को खोदने के लिए "सेतु-समुद्रम" परियोजना का सहारा मिल जाये..इतनी नीचता तो अंग्रेज भी नहीं किये.

यदि आप इलेक्ट्रोनिक्स से एम्-टेक करके इसरो की नौकरी छोडकर भारत की जनता को जगाने के काम करते हुए शहीद हुए राजीव दिक्सित के व्याख्यान सुने हो तो उन्होंने ६ साल पहले ही कहा था की मनमोहन सिंह अमेरिका का एजेंट है और वह भारत के समुद्री तलहटी में दबी कई प्रकार बहुमुक्य खनिजों को अमेरिका को फ्री में दे रहा है, जिसके चलते राजीव जी मृत्यु हुई और उसमे दबी जबान से दुसरो का नाम उछला जाता है..खैर , जो भी हो, राजीव भाई ने सबको ज़िंदा तो कर ही दिया है. आपकी जानकरी के लिए बता दू, राजीव दिक्सित भाई "भारत स्वाभिमान " के संस्थापक सदस्य थे.
आज जब की भारत की सबसे बड़ी लूट का खुलासा हो चुका है, भारत के ईमानदार लोगो से जो की विभिन्न सरकारी सस्थानो में महत्वपूर्ण पदों पर हैं, उसकी लूट की विवरण फेक मेल आईडी से फस्बुक और नेट पर डालकर देश को बचने में सहयोग करे.

थोरियम की तकनीक इतनी सरल है की उसे कार में अमेरिका चलाकर टेस्ट कर चुका है और भारत के वैज्ञानिको के पास यह तकनीक ५ साल पहले से है, अमेरिका यह काम छुपकर कर रहा है जिससे की भारत में इसके लिए आवाज न उठे लेकिन कब तक.... अमेरिका थोरियम की वजह से अरब देशो के ब्लैकमेल से छुटकारा पाना चाहता है और भारत....हर साल ५.५ लाख करोड का तेल आयात करता है. बही खीझ होती है की भारत में कोई भी नहीं है जो भारत के बारे में सोचे...
(मनमोहन राज में घोटाले UPA 2 में ही नहीं हुए बल्कि भारत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला 2004 यानी यूपीए-एक में ही शुरू हो गया था, जिसके सामने कोलगेट और 2G घोटाले भी शर्मिंदा हो जाते है. भारतीय बाज़ार मूल्य में इस घोटाले की राशि करीब 48 लाख करोड़ रूपये है और अंतर्राष्ट्रीय मूल्य से यह घोटाला 242 लाख करोड़ रुपये का हो जाता है. दरअसल भारतीय समुद्री तटों पर हुए इस घोटाले में पिछले कुछ सालों में बेशकीमती इक्कीस लाख टन मोनाजाईट, जो कि 195300 टन थोरियम के बराबर है, जो गायब हो चुका है. थोरियम परमाणु उर्जा बनाने के काम आने वाला बेहतरीन ईंधन है जो कि रेडियोधर्मी गुणों के बावजूद बहुत कम विकिरण के कारण यूरेनियम मुकाबले बेहद सुरक्षित परमाणु ईंधन है. थोरियम परमाणु उर्जा केन्द्रों के लिए ही नहीं बल्कि परमाणु मिसाइलों में भी काम आता है.
गौरतलब है कि कुछ देशों में ही मोनाजाईट रेत में मिलता है और भारत भी उन विरले देशों में शामिल है. भारत में मोनाजाईट ओडिसा के रेतीले समुद्री तटों के अलावा मनावालाकुरिची (कन्याकुमारी) और अलुवा-चवारा (केरल) के रेतीले समुद्री तटों पर पाई जाने वाली रेत में होता है, जिससे इसे रेत से अलग किया जाना बहुत ही आसान होता है. जबकि अधिकांश देशों में मोनाजाईट पथरीली चट्टानों में होने के कारण उसे निकालना ना केवल बेहद महंगा बल्कि श्रमसाध्य भी होता है.)
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सिर्फ एक ही विकल्प -मोदी
-- आपने स्वयं और अपने परिवार
के लिए सब कुछ किया, देश के लिए भी कुछ करिये,
क्या यह देश सिर्फ
उन्ही लोगो का है जो सीमाओं पर मर जाते हैं??? सोचिये......