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ॐसोमानी जी आपने बहुत सही कहाअपनी मर्यादा का ख्याल इनको नहीं हैदुसरे को सिखाने की कोशिश कर रहे हैंकिरण बेदी ओम पूरी ने वही कहा जो आम जनता कहती हैराजीव रेनुसागर
2011/8/29 budh pal singh Chandel <bps1c...@gmail.com>
ॐ ,allभाई सोमानी जी,
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कांग्रेस ने अनिवार्य मतदान का कानून क्यों नहीं बनाया, इसके पीछे नेहरू खानदान का सबसे बडा डर छिपा है, देखे कैसे....
१-अनिवार्य वोटिंग / मतदा का मलतब है की भारत की हर जनता को अपना मताधिकार का प्रयोग करना ही है.
२-सरदार पटेल से एक बार बहुत बुरी तरह से हारकर नेहेरू को यह अहसास हो गया की उन्हें हिंदू कतई पसंद नहीं करते हैं, ज्ञात हो १५ प्रदेशीय कांग्रेस कमेटियो के १५ वोटो में से नेहरु को मात्र एक और पटेल को १४ वोट मिले थे.
३-नेहरू ने इस गणित को तुरंत पहचाना और अपना धर्म छिपाते हुए भारत की जनता को लोकतंत्र के महापर्व मतदान से हर प्रकार से उदासीन रखने की कोशिश की. कांग्रेस का जो रवैया शुरू से रहा है, उन्हें हिन्दुओ का वोट मिलता ही नहीं या यह कहे की जागरूक हिंदू और अधिकांश हिंदू शुरू से ही कांग्रेस विरोधी रहे है जो इनके हिंदू विरोध और मुस्लिम प्यार की वजह से था.
४-जिस भारत में मुस्लिम १०% से कम थे, सोचिये की यदि मतदान अनिवार्य होता तो क्या सभी हिंदू वोट डालकर कांग्रेस को सत्ता देते, कभी नहीं, या यह कहिये की यदि अनिवार्य मतदान का कानून होता तो कांग्रेस कब की समाप्त हो चुकी होती. नेहरू ने दो चीजों पर बहुत ध्यान दिया- पहला उनका असली धर्म के बारे में लोग न जान पायें खासकर हिंदू, दूसरा हिन्दुओ को बांटकर उसका १५% वोट ले ले. हालाकि ज्यादातर मुस्लिम नेताओ को नेहरू के असली धर्म के बारे में मालूम था लेकिन हिंदू नेताओ को वहा तक सोचने का मौका ही नहीं दिया और नेहरू हिन्दुओ से बहुत कम मिलते जुलते थे बल्कि हिन्दुओ से ज्यादा वे ईसाइयों को तरजीह देते थे.
५-आज भी यदि अनिवार्य मतदान का कानून बना दिया जाये तो कांग्रेस ३ राज्यों को छोडकर कही भी सत्ता में नहीं होगी, असल में बीजेपी के अनिवार्य मतदान की माग के पीछे यही यही तर्क है जो बीजेपी बहुत समय गवाने के बाद सोच पाई है, असल में इसके भी पीछे अडवानी की चाल रही है उन्होंने किसी धुर हिन्दुवादी को पनपने ही नहीं दिया बीजेपी में और हमेशा ही सोनिया के संपर्क में रहे... सोनिया भी कमोबेस नेहरू के नक्शेकदम पर चलकर एकदम यही काम कर रही है, सोनिया के निजी जिंदगी के बारे में नेटीजनो के अलावा कोई नहीं जानता है.
६-भारत में ४५% मतदान होता है और १८% से २३% मत पाने वाला जित जाता है, यह भी देखा गया की मुस्लिम वोट हमेशा ही कांग्रेस को मिलता रहा और थोक के भाव मिलाता रहा, यदि मुस्लिम वोटो में कुछ हिंदू वोट भी जुड जाये तो कांग्रेस का जितना तय. बस... बस.. यही गणित कांग्रेस के नेहरू और इंदिरा अपनाती रही, उन्होंने हिन्दुओ को अपने धर्म के बारे में कभी भी नहीं जानने दिया और हिन्दुओ को बरगलाते रहे और देश को लुटते रहे.. जो मिडिया बाल की खाल निकलती रहती है उसने कभी भी नेहरू के खानदानी जुड़ाव और असलियत पर कोई भी डाक्यूमेंट्री अभी तक बनाई न दिखाई . सोनिया और राहुल आज तक कभी किसी “आप की अदालत-सीधी बात—हॉट सीट “ आदि कार्यक्रमों में दिखे...??? कभी नहीं और कभी दिखेंगे भी नहीं..
“अनिवार्य मतदान का मतलब है की भारत में हिन्दुओ की सत्ता इसीलिये तथाकथित धर्मनिर्पक्ष ताकते अनिवार्य मतदान का कानून बनाने में बहुत दिक्कत पैदा करेंगी.”
जय भारत..
(अयोध्या से संजय कुमार मौर्य का विश्लेषण)
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आपने स्वयं और अपने परिवार के लिए सब कुछ किया, देश के लिए भी कुछ करिये,
क्या यह देश सिर्फ उन्ही लोगो का है जो सीमाओं पर मर जाते हैं??? सोचिये......