जय भारत
"ॐ"
मेरे विचार से भारतीय मूल्यों से अपना चरित्र निर्माण कर जीवन जिया जाये तो स्वेदेशिकरण अपनेआप ही हो जायेगा और हम किसी भी रूप में विदेशी वस्तु के सम्पर्क में नि आये गे..
मानवता को अपना , हवस को दूर कर भोग विलासिता को आज कि मजबूरी न बना कर हम सच में भारतीय और स्वेदेशी बन सकते हे.
ऐसा मेरा मानना हे और में ऐसा ही कर रहा हू. काम में भी करता हू और हर जरुरत कि वस्तु का उपभोग भी पर सिर्फ अपनी हवस को पूरा करने के लिए या समाज में अपने को बा दिखाने के लिए या लोगो में अपने को महान बनाने के लिए नही बल्कि एक साफ़ सुथरा ऐसा जीवन जीने के लिए जो भारतीय मूल्यों पर आधारित हे.
बहुत थोड़े में कुछ उदाहरण जैसे:
कभी भी बड़ी गाड़ी, बड़े टेलीविजन, बड़ी कम्पुटर स्क्रीन, बड़े मोबाइल, और सुर, सुरा व सुन्दरी (हद दर्जे कि बदतमीजी) को यदि हम अपने जीवन में कोई स्थान न दे तो भारतीयता और स्वेदिशिकरण अपने आप हो जाये गा.
जय भारत