ओउम,
भाइयो और बहनों ,
मान्शाहर और शाकाहार ये दोनों एरिया के अनुसार होता था जहा पर जो चीजे मिलती थी उसे उसी के अनुसार अपने धर्म में जोर दिया. गया. मान्शाहर और शाकाहार हमने अलाग अलग किया है. परन्तु हमें खानने के लिए किसी न किसी को मारना ही परता है. आत्मा तो अन्न में भी होता है.
कुछ उदहारण देता हु जो एरिया के अनुसार ये साब लिखा है.
१. कुरान अरब में लिखी गई है वह रेगिस्तान है. और खाने को हरी सब्जी कम मिलती थी इसलिए meat को जायज है.
२. दुर्गा पुराण में मछली उच्च माना गया है. इसिलिय्र बंगाल इसे खाया जाता है. क्योकि उस एरिया में मछली बहूत मिलती है.
३. BIBLE में MEAT जायाज माना जाता क्यों उरोप TEMP बहूत डाउन रहता है इस कारन वह कई महीनो तक अन्नं को रख नहीं सकते थे. इसलिए वह इसे खाया जाता है.
४. अफ्रीका और जंगली एरिया में जंगली जानवर को मर खाते थे. जिसे आदिवासी कहते है. वह जायज है.
५. चाइना और जापान में कुत्ते और सांप को खाया जाता है. क्योकि वहा ये बहूत ज्यादा मिलता है.
६. भारत (समुद्री एरिया के छोर ) अन्न (चावल और दाल और गेंहू ) मिलता इसीलिए इसे जायज कहते है. और वातावरण इसके अनुकूल है .
परतु आज ट्रांसपोर्ट और धर्म परिवर्तन के कारण इसे अपने अपने धर्म के अनुसार करने लगे.
अदि कोई मुस्लमान और इसाई बन गया तो अपना आचरण उसी जैसे हो गिये. कोई जैन बन गया तो उरोप में भी मांस नहीं खाते.
मेरे कहने का मतलब जो जन्हा मिलता है उसी अनुसार खाना होता है. मान्शाहर और शाकाहार कुछ नहीं होता है.
परन्तु हमें शाकाहार खाना ही खाना चईये अदि ये न मिले तभी मांस का सकते है.
क्योकि
1. इससे संसार में हरियाली बढ़ेगी. आज अन्न को कही भी रख सकते है. उरोप और अरब में भी कोई ISSUE नहीं है.
२. दुनिया में शांति रहेगी. क्योंकी मांस न खाने से आचरण उत्तम होता है. हिंसक विचार कम होगा.
३. जमीं का उपयोग अन्न क्र लिए करंगे तो पर्दुसन कम होगा. और हरित क्रांति होगा.
४. किसानो मजदूरो को रोज्कार मिलेगा.
५. जानवरों को उपयोग खेती और मिल्क के लिए कर सकते है.
६. अथर्वेद में इसका पूरा वर्णन है. हम माँ और गो या बकरी या ऊंट या भैंस के दूध से हम बढ़े होते है. इसलिए इन जानवरों हो माँ के तुल्य माना गया है. भारत में गो को माता कहते है. इसका मतलब ये है की भारत में गाय ज्यादा पाया जाता था. परतु सब जानवर जिसका हम दूध पिटे माता है.हम अपने माता का मांस कैसे खा सकते है.
7. उसी प्रकार जिसका अंडे खाते है बाद में उस मुर्गी को खा जाते है. क्या ये जायज है. (अंडे और अन्न PASSIVE है परतु जानवर ACTIVE होते है.)
धने वाद
शिव कुमार