रवि शंकर यादव
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Isame Muslim, sikh, isai aur bhi hai..
krupaya bharatko khali hundu rashtra sambodhakar kamjor mat baniye aur
banaiye. Hameto sabke sath lekar chalna hai
Rakesh Patil
Pune, Bharat
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BE HAPPY & KEEP SMILING
bhaiyo apna bharat sirf hinduokahi nahi hai.
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krupaya bharatko khali hundu rashtra sambodhakar kamjor mat baniye aur
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Rakesh Patil
Pune, Bharat
On 12/23/10, Prakriti Aarogya Kendra <prakri...@gmail.com> wrote:
> आपके द्वारा एक और विद्वतापूर्ण लेख..पढ़कर कृतकृत्य हुआ
>
>
> 2010/12/23 Shankar Dutt Fulara <shanka...@gmail.com>
>
>> बिलकुल सही विश्लेषण किया है मैं इससे सहमत हूँ बहुत विद्वता पूर्ण आलेख |
>>
>> २३ दिसम्बर २०१० १२:४५ अपराह्न को, Ravi Shanker <
>> infoemplo...@gmail.com> ने लिखा:
>>
>> जब लोग कहते हैं कि विश्व में केवल एक ही हिन्दू देश है तो यह पूरी तरह
>>> गलत है यह बात केवल वे ही कह सकते हैं जो हिन्दू की परिभाषा को नहीं
>>> जानते । इसके लिए सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि हिन्दू की परिभाषा
>>> क्या है ।
>>> हिन्दुत्व की जड़ें किसी एक पैगम्बर पर टिकी न होकर सत्य, अहिंसा
>>> सहिष्णुता, ब्रह्मचर्य , करूणा पर टिकी हैं । हिन्दू विधि के अनुसार
>>> हिन्दू की परिभाषा नकारात्मक है परिभाषा है जो ईसाई मुसलमान व यहूदी नहीं
>>> है वे सब हिन्दू है। इसमें आर्यसमाजी, सनातनी, जैन सिख बौद्ध इत्यादि सभी
>>> लोग आ जाते हैं । एवं भारतीय मूल के सभी सम्प्रदाय पुर्नजन्म में विश्वास
>>> करते हैं और मानते हैं कि व्यक्ति के कर्मों के आधार पर ही उसे अगला जन्म
>>> मिलता है । तुलसीदास जीने लिखा है परहित सरिस धरम नहीं भाई । पर पीड़ा सम
>>> नहीं अधमाई । अर्थात दूसरों को दुख देना सबसे बड़ा अधर्म है एवं दूसरों को
>>> सुख देना सबसे बड़ा धर्म है । यही हिन्दू की भी परिभाषा है । कोई व्यक्ति
>>> किसी भी भगवान को मानते हुए, एवं न मानते हुए हिन्दू बना रह सकता है ।
>>> हिन्दू की परिभाषा को धर्म से अलग नहीं किया जा सकता । यही कारण है कि
>>> भारत में हिन्दू की परिभाषा में सिख बौद्ध जैन आर्यसमाजी सनातनी इत्यादि
>>> आते हैं । हिन्दू की संताने यदि इनमें से कोई भी अन्य पंथ अपना भी लेती
>>> हैं तो उसमें कोई बुराई नहीं समझी जाती एवं इनमें रोटी बेटी का व्यवहार
>>> सामान्य माना जाता है । एवं एक दूसरे के धार्मिक स्थलों को लेकर कोई झगड़ा
>>> अथवा द्वेष की भावना नहीं है । सभी पंथ एक दूसरे के पूजा स्थलों पर आदर
>>> के साथ जाते हैं । जैसे स्वर्ण मंदिर में सामान्य हिन्दू भी बड़ी संख्या
>>> में जाते हैं तो जैन मंदिरों में भी हिन्दुओं को बड़ी आसानी से देखा जा
>>> सकता है । जब गुरू तेग बहादुर ने कश्मीरी पंडितो के बलात धर्म परिवर्तन
>>> के विरूद्ध अपना बलिदान दिया तो गुरू गोविन्द सिंह ने इसे तिलक व जनेउ के
>>> लिए उन्होंने बलिदान दिया इस प्रकार कहा । इसी प्रकार हिन्दुओं ने भगवान
>>> बुद्ध को अपना 9वां अवतार मानकर अपना भगवान मान लिया है । एवं भगवान
>>> बुद्ध की ध्यान विधि विपश्यना को करने वाले अधिकतम लोग आज हिन्दू ही हैं
>>> एवं बुद्ध की शरण लेने के बाद भी अपने अपने घरों में आकर अपने हिन्दू
>>> रीतिरिवाजों को मानते हैं । इस प्रकार भारत में फैले हुए पंथों को किसी
>>> भी प्रकार से विभक्त नहीं किया जा सकता एवं सभी मिलकर अहिंसा करूणा
>>> मैत्री सद्भावना ब्रह्मचर्य को ही पुष्ट करते हैं ।
>>> इसी कारण कोई व्यक्ति चाहे वह राम को माने या कृष्ण को बुद्ध को या
>>> महावीर को अथवा गोविन्द सिंह को परंतु यदि अहिंसा, करूणा मैत्री सद्भावना
>>> ब्रह्मचर्य, पुर्नजन्म, अस्तेय, सत्य को मानता है तो हिन्दू ही है । इसी
>>> कारण जब पूरे विश्व में 13 देश हिन्दू देशों की श्रेणी में आएगें । इनमें
>>> वे सब देश है जहाँ बौद्ध पंथ है । भगवान बुद्ध द्वारा अन्य किसी पंथ को
>>> नहीं चलाया गया उनके द्वारा कहे गए समस्त साहित्य में कहीं भी बौद्ध शब्द
>>> का प्रयोग नहीं हुआ है । उन्होंने सदैव इस धर्म कहा । भगवान बुद्ध ने
>>> किसी भी नए सम्प्रदाय को नहीं चलाया उन्होनें केवल मनुष्य के अंदर
>>> श्रेष्ठ गुणों को लाने उन्हें पुष्ट करने के लिए ध्यान की पुरातन विधि
>>> विपश्यना दी जो भारत की ध्यान विधियों में से एक है जो उनसे पहले सम्यक
>>> सम्बुद्ध भगवान दीपंकर ने भी हजारों वर्ष पूर्व विश्व को दी थी । एवं
>>> भगवान दीपंकर से भी पूर्व न जाने कितने सम्यंक सम्बुद्धों द्वारा यही
>>> ध्यान की विधि विपश्यना सारे संसार को समय समय पर दी गयी ( एसा स्वयं
>>> भगवान बुद्ध द्वारा कहा गया है । भगवान बुद्ध ने कोई नया पंथ नहीं चलाया
>>> वरन् उन्होंने मानवीय गुणों को अपने अंदर बढ़ाने के लिए अनार्य से आर्य
>>> बड़ी ही आसानी से निकलता है कि दोनों के मूल में अहिंसा, करूणा,
>>> ब्रह्मचर्य एवं सत्य है । दोनों को एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता ।
>>> और हिन्दओं का केवल एक देश नहीं बल्कि 13 देश हैं ।
>>> इस प्रकार हम देखते हैं विश्व की कुल जनसंख्या में भारतीय मूल के धर्मों
>>> की संख्या 20 प्रतिशत है जो मुस्लिम से केवल एक प्रतिशत कम हैं । एवं
>>> हिन्दुओं की कुल जनसंख्या बौद्धों को जोड़कर 130 करोड़ है। है जो मुसलमानों
On Dec 23, 9:14 pm, dehydratedpaani <dehydratedpa...@gmail.com> wrote:
> hum apna majhab, dharma, way of life apne tak rakhein to bahut hi aacha
> hoga.
>
> filhal to desh ka way of life corruption hai, aur isko sudharne ke liye ekta
> chahiye aur kadak kanoon vyavastha. iss mein koi 2 rahein nahi ho sakti.
>
> hamein sirf bharat swabhiman par apni ekagrata badhani hai, na ki koi side
> issue par.
>
> 2010/12/24 निशांत <nishant....@gmail.com>
>
> > bahut badiya lekh hai
> > shandar hai
>
> > Hindu hona kisi dharma ya majhab se nahi hai...Hinduism is a way of
> > life...Request the protesters to read the article to get the brotherhood
> > feeling
>
> > 2010/12/23 Komal Pandey <rajiv.bs...@gmail.com>
>
> >> Me rakesh ji ke baat se bilkul so feeshadi sahamat hu.
>
> >> dekho humari pahachaan to ye hai hai naa Unity in Diversity (Anekta me
> >> Aikata)
> >> fir to hamko dharma wali baat nahi karni chahiye.
>
> >> es desh ke sab tarah ke log rahate hai sab miljul ke es desh ko sone ki
> >> chidiya banayenge jo vishwa me anokha desh hoga.
>
> >> aur ek unueq example bhi hoga vishwa ke liye.
>
> >> jai bharat jai hind
>
> >> 2010/12/23 Rakesh Patil <rakeshspa...@gmail.com>
>
> >>> bhaiyo apna bharat sirf hinduokahi nahi hai.
>
> >>> Isame Muslim, sikh, isai aur bhi hai..
>
> >>> krupaya bharatko khali hundu rashtra sambodhakar kamjor mat baniye aur
> >>> banaiye. Hameto sabke sath lekar chalna hai
>
> >>> Rakesh Patil
>
> >>> Pune, Bharat
>
> >>> On 12/23/10, Prakriti Aarogya Kendra <prakriti.p...@gmail.com> wrote:
> >>> > आपके द्वारा एक और विद्वतापूर्ण लेख..पढ़कर कृतकृत्य हुआ
>
> >>> > 2010/12/23 Shankar Dutt Fulara <shankarful...@gmail.com>
>
> >>> >> बिलकुल सही विश्लेषण किया है मैं इससे सहमत हूँ बहुत विद्वता पूर्ण आलेख
> >>> |
>
> >>> >> २३ दिसम्बर २०१० १२:४५ अपराह्न को, Ravi Shanker <
> >>> >> infoemploymentn...@gmail.com> ने लिखा:
> ...
>
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