ॐ,
शशांक जी ने प्रतिस्पर्धा के कुछ अवगुण गिनाये !
मेरे हिसाब से प्रतिस्पर्धा एक अग्नि है , उसके फायदे और नुक्सान दोनों है , आप जैसे प्रयोग करें !
प्रतिस्पर्धा से विद्यालय में छात्र अधिक मेहनत करते है , खेलकूद में इसी से हमें आगे बढना होता है ! प्रतिस्पर्धा एक natural feeling है ! प्रतिस्पर्धा केवल दूसरों से नही स्वयं से भी होती है , और ये ही असली प्रतिस्पर्धा है , क्यूंकि मै किसी और के कार्यों का कुछ नहीं कर सकता , मै केवल अपने जीवन और कार्यों पर ही नियंत्रण रख सकता हूँ ! यह सकारात्मक ऊर्जा है
प्रतिस्पर्धा से द्वेष भी उत्पन्न हो सकता है , जिससे मनुष्य नकारात्मक कार्यों में प्रयोग में लाता है !
जय भारत