भारत में इन्टरनेट, फिल्मे और टीवी की दुनिया

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Sandeep Kumar Maurya

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Apr 10, 2013, 3:04:49 AM4/10/13
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भाई राजीव दीक्षित ने २०१० में एक व्याख्यान दिया था "भारत का नैतिक एवं चारित्रिक पतन"' जिसमे उन्होंने कहा था कि इसके लिए सबसे जयादा जिम्मेदार फिल्मे और इन्टरनेट है,  यदि कुछ सबसे ज्यादा खोजा और देखा जाता है तो वो है, sex और vulgarity. मेरे दिमाग में एक बात आयी कि चेक करते है कि २०१२ में 
भारत में सबसे ज्यादा नेट पर खोजे गए विषय क्या थे जिसके लिए मैंने GOOGLE ZEITGEIST को डाउनलोड किया तो उनकी बात २०१२ के लिए भी बिलकुल सत्य निकली. सबसे ज्यादा खोजे गए विषय में अगर पहले दो स्थानों को छोड़ दिया जाय जो कैरिअर से सम्बंदित था, तो बाकि जो जनरल विषय थे  तीसरे, चौथे और पांचवे स्थान पर क्रमशः सनी लियोन, एक था टाइगर और रौअडी रातौर था . यदि लोगो की कटेगरी में देखे तो वह भी सनी लियोन ने टाप किया और टॉप ९ स्थानों तक इन भाड़ो ने कब्ज़ा किया हुआ है. अब इससे तो पता चलता है की इसका सदुपयोग कम और समय ज्यादा बर्बाद किया जा रहा है. क्यों नहीं  भारत सरकार ऐसी वेब साइट्स  पर प्रतिबंद लगा देती जो अश्लीलता फैलाते है.क्यों न कुछ ऐसी व्यवस्था की जाय जिससे बच्चे  इसका दुरुपयोग न करे इसका उन पर नैतिक दवाव हो, नहीं तो आने वाले समय में हत्या बतात्कर लुट की घटनाये और बढेगी, क्योकि जब नैतिक  पतन होता है तो यही सब बढ़ता है.टेलीविज़न पर जब फिल्मो में अश्लीलता  विषय पर बहस करना होता है तो उन्ही भाड़ो को बुलाया जाता है जो इसको बढावा देते है, ये तो ऐसी बात हुई जैसे मैंने लोगो की सुपारी लेने की एजेंसी खोल रखी हो और इनको बंद कैसे किया जाय इस विषय पर व्याखान देने के लिए मुझे बुलाया जाय. ये भाड़ अजीबोगरीब तर्क देते जैसे जिसे पसंद नहीं वो ना देखे या चैनल बदल दे अब इनको कौन बताये की जब सरे चैनल यही कर रहे तो लोग क्या देखे. अरे जब तुमने नालो की नदी बहा रखी है तो उसमे गंगाजल कहा मिलेगा. श्री भागवत गीता में अर्जुन भगवान से पूछते है की इस मन को तो बस में करना हवा को बस में करने जैसा है, इसको कैसे जीता जाय तो भगवान कहते है अनुशाषित रहकर और अभ्यास द्वारा इसको बस में किया जा सकता है, जब देवताओ के लिए ये इतना कठिन है तो आज की पीढ़ी के लिए कितना कठिन होगा ये  अनुमान आप लगा सकते है. मेरे हिसाब से बॉलीवुड और जितने क्षेत्रीय वुड है( कही कही तो ये बॉलीवुड से भी आगे है, जैसे भोजपुरी फिल्मो में) को एक झटके में बिना किसी हिचक के बंद कर देना चाहिए. भारतीय फिल्मे नाट्य शास्त्र और संगीत भारतीय शास्त्रीय संगीत आधारित होना चाहिए. हमारी संस्कृति का एक स्तंभ भारतीय शास्त्रीय संगीत, जीवन को संवारने और सुरुचिपूर्ण ढंग से जीने की कला है। यह आधार है हर तरह के संगीत का साथ ही ऐसी गरिमामयी धरोहर है जिससे लोक और लोकप्रिय संगीत की अनेक धाराएँ निकलती हैं जो न सिर्फ हमारे तीज त्योहारों में राग रंग भरती हैं बल्कि हमारे विभिन्न संस्कारों और अवसरों में भी उल्लासमय बनाते हुए अनोखी रौनक प्रदान करती हैं।

न्यूज़ चैनलो पर भी लगाम लगाने की जरुरत है जो हिन्दू रीति रिवाजो का तो मजाक उड़ाते है और अन्य धर्मो पर चुप्पी साधे रहते है. पर एक दिन मै NDTV INDIA पर एक बहस देख रहा था जो संस्कार के विषय पर था. संचालित करने वाले पत्रकार का नाम था रवीश, और वह कह की हिन्दू धर्म में महिलाये पति के लिए व्रत रखती है लेकिन पति ऐसा व्रत नहीं करते. अब इस मुर्ख को कौन बताये की कोई यह जबरदस्ती करने के लिए नहीं कहता, ये उनकी इच्छा और प्रेम है की वे चाहे तो रहे या नहीं. भारतीय समाज में महिलाओ का स्थान पुरुष से ऊपर है.व्रत तो हमारे अन्दर पवित्रता लाने के लिए होता है, और इस बात में तनिक भी संदेह नहीं है की महिलाये पुरुष की अपेक्षा ज्यादा धार्मिक और पवित्र होती है. आपने कई बार 'देवियों और सज्जनों" का संबोधन सुना होगा, लेकिन क्या  आपने कभी "देवियों और देवतावो" का संबोधन सुना है. ये सब इन गद्दारों को नहीं सूझता. अब हमारे पास एक ही विकल्प है मोदी लाओ देश बचाओ.

अगर राजीव भाई ने मोदी के बारे में कही कुछ कहा हो तो वो लिंक मुझे जरूर भेजे. आप सभी को धन्यवाद् 

जय हिन्द 
संदीप कुमार मौर्य 
SALALAH, OMAN

RAMLAKHAN SAINI

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Apr 11, 2013, 7:48:42 AM4/11/13
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ok thanks give me more iformation

2013/4/10 Sandeep Kumar Maurya <skmw...@gmail.com>:
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