पांचाली के चीर हरण पर जो चुप पाए जायेंगे, इतिहासों के पन्नो में वे सब कायर कहलायेगे ||
यहाँ शहीदों की पावन गाथाओं को अपमान मिला, डाकू ने खादी पहनी तो संसद में सम्मान मिला ||
डॉ. हरिओम पंवार
मैं भी गीत सुना सकता हूँ , शबनम के अभिनन्दन के,
मैं भी ताज पहन सकता हूँ नंदन वन के चन्दन के ||
लेकिन जब तक पगडण्डी से संसद तक कोलाहल है,
तब तक केवल गीत लिखूंगा जन गन मन के क्रंदन के ||
जब पंछी के पंखो पर हो पहरे बम के गोली के,
जब पिंजरे में कैद पड़े हो सुर कोयल की बोली के ||
जब धरती के दामन पर हो दाग लहू की होली के,
कोई कैसे गीत सुना दे बिंदिया कुमकुम रोली के ||
मैं झोपड़ियों का चारण हूँ आंसू गाने आया हूँ ,
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ ||
अन्धकार में समां गए जो तूफानों के बीच जले,
मंजिल उनको मिली कभी जो चार कदम भी नहीं चले ||
क्रांतिकथा में गौण पड़े है, गुमनामी की बाहों में,
गुंडे तस्कर तने खड़े है राजमहल की राहों में ||
यहाँ शहीदों की पावन गाथाओं को अपमान मिला,
डाकू ने खादी पहनी तो संसद में सम्मान मिला ||
राजनीति में लोह पुरुष जैसा सरदार नहीं मिलता,
लाल बहादुर जी जैसा कोई किरदार नहीं मिलता ||
ऐरे गेरे नत्थू खैरे तंत्री बन कर बैठे है,
जिनको जेलों में होना था मंत्री बन कर बैठे है ||
लोक तंत्र का मंदिर भी बाज़ार बना कर डाल दिया,
कोई मछली बिकने का बाज़ार बना कर डाल दिया ||
अब जनता को संसद भी प्रपंच दिखाई देती है,
नौटंकी करने वालों का मंच दिखाई देती है ||
पांचाली के चीर हरण पर जो चुप पाए जायेंगे,
इतिहासों के पन्नो में वे सब कायर कहलायेगे ||
कहाँ बनेंगे मंदिर मस्जिद कहाँ बनेगी राजधानी,
मंडल और कमंडल पी गए सबकी आँखों का पानी ||
प्यार सिखाने वाले बस ये मजहब के स्कूल गए,
इस दुर्घटना में हम अपना देश बनाना भूल गए ||
कहीं बमों की गर्म हवा है और कहीं त्रिशूल जले,
सांझ चिरैया सूली टंग गयी पंछी गाना भूल गए ||
आँख खुली तो पूरा भारत नाखूनों से त्रस्त मिला,
जिसको जिम्मेदारी दी वो घर भरने में व्यस्त मिला ||
क्या यही सपना देखा था भगत सिंह की फ़ासी ने,
जागो राजघाट के गाँधी तुम्हे जगाने आया हूँ,
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ ||
जो अच्छे सच्चे नेता है उन सबका अभिनन्दन है,
उनको सौ सौ बार नमन है मन प्राणों से वंदन है ||
जो सच्चे मन से भारत माँ की सेवा कर सकते है,
हम उनके कदमो में अपने प्राणों को धर सकते है ||
लेकिन जो कुर्सी के भूखे दौलत के दीवाने है,
सात समुंदर पार तिजोरी में जिनके तहखाने है ||
जिनकी प्यास महासागर है भूख हिमालय पर्वत है,
लालच पूरा नीलगगन है दो कौड़ी की इज्ज्ज़त है ||
इनके कारण ही बनते है अपराधी भोले भाले,
वीरप्पन पैदा करते है नेता और पुलिस वाले ||
केवल सौ दिन को सिंघासन मेरे हाथों में दे दो,
काला धन वापस न आये तो मुझको फ़ासी दे दो ||
जब कोयल की डोली गिद्धों के घर में आ जाती है,
तो बगला भगतो की टोली हंसों को खा जाती है ||
जब जब जय चंदो का अभिनन्दन होने लगता है,
तब तब सापों के बंधन में चन्दन रोने लगता है ||
जब फूलों को तितली भी हत्यारी लगने लगती है,
तो माँ की अर्थी बेटों को भारी लगने लगती है ||
जब जुगनू के घर सूरज के घोड़े सोने लगते है,
तो केवल चुल्लू भर पानी सागर होने लगते है ||
सिंहो को म्याऊँ कह दे क्या ये ताकत बिल्ली में है,
बिल्ली में क्या ताकत होती कायरता दिल्ली में है ||
कहते है की सच बोलो तो प्राण गवाने पड़ते है,
मैं भी सच्चाई को गाकर शीश कटाने आया हूँ,
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ ||
कोई साधू सन्यासी पर तलवारे लटकाता है,
काले धन की केवल चर्चा पर भी आँख चढ़ाता है ||
कोई हिमालय ताजमहल का सौदा करने लगता है,
कोई यमुना गंगा अपने घर में भरने लगता है ||
कोई तिरंगे झंडे को फाड़े फूके आज़ादी है,
कोई गाँधी को भी गाली देने का अपराधी है ||
कोई चाकू घोप रहा है संविधान के सीने में,
कोई चुगली भेज रहा है मक्का और मदीने में ||
कोई ढाँचे का गिरना UNO में ले जाता है,
कोई भारत माँ को डायन की गाली दे जाता है ||
कोई अपनी संस्कृति में आग लगाने लगता है,
कोई बाबा रामदेव पर दाग लगाने लगता है ||
सौ गाली पूरी होते ही शिशुपाल कट जाते है,
तुम भी गाली गिनते रहना जोड़ सिखाने आया हूँ,
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ |
डॉ. हरिओम पंवार
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मित्रों, दिल्ली में मौजूद ब्रिटिश के नुमाइंदों ने जर्नल डायर से शक्तियाचना के साथ, ब्रिटिश सरकार के जलियाँवाला बाग के अधूरे मंसूबे को पूरा करने के लिये रामलीला मैदान में बर्बरतापूर्ण कार्यवाही को आरंभ कर, भारतदेश को, भविष्य में, दमनकुंड में झोंक देने के अपने इरादों को स्पष्ट कर दिया है. काँग्रेस इस सच्चाई से अच्छी तरह वाकिफ है कि अब तो उनका 'स्विस एवं अन्य विदेशी बैंकों में जमा' पैसा भी जाने वाला है और सरकार भी जाने वाली है.
मित्रों, ईराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान आदि की ही तर्ज पर, अमेरिका एवं उसके मित्र देश, हमारे ही आस्तीन के सपोलों की मदद से, भारत में भी घुसने एवं कार्यवाही करने के लिये, मौके की ताख में उधार बैठे हुये हैं.
देशद्रोहियों के अलावा देश में मौजूद, समस्त देशप्रेमियों को (चाहे वो किसी भी जाति, धर्म, पंथ, संगठन, राजनीतिक पार्टी अथवा स्वतंत्र विचारधाराओं से ही ताल्लुक क्यों न रखते हों), माँ भारती उन सभी से आव्हान करती है कि "ओ !!! सदियों से, अलग-अलग, बिखरी पड़ी हुई मेरी संतानों !!! तुम्हें आजतक, अलग-अलग बिखरा कर, इन देशद्रोहियों ने ही रखा हुआ है. सबकुछ भूल भुला कर एक हो जाओ... एक. अब भी वक्त है, एक हो जाओ... एक.
बाबा रामदेव का "नार्को-टेस्ट-अभियान"
मित्रों, जिस व्यक्ति का नार्को टेस्ट करना होता है, पहले उस व्यक्ति को बेहोश किया जाता है. तत्पश्चात, जैसे-जैसे वह व्यक्ति 'नार्को-टेस्टिंग' की भिन्न-भिन्न अवस्थाओं से गुजरता है... वैसे-वैसे उस व्यक्ति का 'अन्तर्मन' अपने बाह्यमुख से 'बुदबुदाना/बड़बड़ाना' चालू कर देता है, और जैसे-जैसे वह व्यक्ति 'बड़बड़ाता' जाता है, वैसे-वैसे उस व्यक्ति का बाह्य नकाब हटकर, असली चेहरा सामने आने लग जाता है. श्रद्देय बाबा रामदेवजी महाराज ने अपने मिशन के माध्यम से भारत देश के करीब सवा सौ करोड़, "already बेहोश" लोगों को, एक साथ नार्को टेस्ट के लिये 'तैयार अथवा मजबूर' कर दिया है. पूरा देश अपनी दबी हुयीं 'असल-भावनाओं' को बुदबुदाने लग गया है. बात अच्छे एवं सच्चे देश प्रेमी लोगों की इतनी नहीं है, जितनी कि ऐसे गंदे, भ्रष्ट, झूँठे, देशद्रोहियों की है, जो देशद्रोही होते हुये भी सच्चे देशप्रेमी का नकाब पहन कर अंदर ही अंदर देश को नर्क के गर्क में ढकेलने में लगे हुये हैं. चाहे शाहरुख खान हो, चाहे दिग्विजय सिंह. चाहे जो भी हों. नार्को टेस्ट चालू हों चुका है. अब बिना बुदबुदाये कोई भी रह नहीं पायेगा, एक एक कर सभी बेनकाब होने वाले हैं. धर्म एवं अधर्म के दोनों धड़ों का रूप स्पष्ट होने वाला है. दूध का दूध पानी का पानी होने वाला है.