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धर्म मे पीपल के वृक्ष की पवित्रता के धार्मिक एवं वैज्ञानिक प्रमाण
पीपल के वृक्ष का वर्णन श्रीमद्भगवत गीता मे भगवान कृष्ण ने स्वयं
करते हुए कहा है की मै सब वृक्षो मे सर्वश्रेष्ठ पीपल का वृक्ष हूँ। (अध्याय
10 श्लोक 24)
स्कन्ध पुराण के अनुसार “पीपल
के जड़ मे विष्णु,तने मे केशव,शाखाओं मे
नारायण,,पत्तों मे भगवान हरि निवास करते भाई। यह वृक्ष
मूर्तिमान श्री विष्णुस्वरूप है। इसका गुणो से युक्त और कामना दायक आश्रय मनुष्य
के पापो का नाश करने वाला होता है । (स्कंधपुराण नागर श्लोक 41-44)
वैज्ञानिक आधार: अन्य वृक्षो से अलग पीपल का वृक्ष दिन और रात दोनों समय
प्रचुर मात्र मे आक्सीजन (O2) देता है।
पीपल की छाया गर्मी मे ठंढक और सर्दी मे उष्णता प्रदान करती है। विष्णु जगत के
पालक कहे गए हैं। पीपल भी जीने के लिए
आक्सीजन (O2) देता है अतः पीपल भी
जगत का पालक हुआ इससे इसकी तुलना विष्णु से की गयी है। वैज्ञानिक प्रयागो से सिद्ध हुआ है की पीपल के पत्तों की वायु के
प्रवाह एवं ध्वनि से बीमारी के संक्रामक किटाणु नष्ट हो जाते हैं। आयुर्वेद मे
इसके पत्ते फल एवं छाल सब रोगनाशक माने गए हैं । रक्त विकार(Blood
purification),कफ(cough),पित्त,दाह,वमन(vomiting),शोथ,विषदोष(poisoning),खांसी, ज्वर(fever),हिचकी,नासारोग ,चर्मरोग(skin Problem),जैसे अनेक रोगो के उपचार की औषधि बनाने मे मे पीपल के विभिन्न हिस्सों का उपयोग होता है ।
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Ashutosh Nath Tiwari
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