03 08 2016
पवित्रता
१ - हे मेरे पूज्य और पूर्वज बच्चे ....
२ - स्नेह के रिटर्न की सौगात – पवित्र बनो योगी बनो ...
३- पवित्रता पवित्रता को खींचती है ...
४ - अपने को बचाना ही बापदादा के स्नेह का रेस्पांड है ...
५ - याद की यात्रा से ही पवित्रता और सब कुछ है ....
६ - सच्चाई और सफाई ..
७ - चित्र नही विचित्र और चरित्र को देखो ...
८ - अन्दर बाहर सच्चा रहो ...
९ – सच्चाई अर्थात बुद्धि की सफाई ...
१० - रूप को न देख रूह को देखो ...
११ – कोशिश शब्द को छोड़ कर कशिश रूप बनो ....
१२ – लौकिक चीज को अलौकिक रूप में परिवर्तन करके देखो ….
0४ 08 2016
पवित्रता
१३ - होली मनाना अर्थात सदा के लिए आज के दिन बीती सो बीती का पाठ पक्का करना ...
१४ – प्यूरिटी ही संगमयुग की प्रासपरटी है ....
१५ – कुमार अर्थात पवित्र अवस्था ....
१६ – संगदोष से बच कर रहना ....
१७ – सपूत बन हर शिक्षा का सबूत दुखाओ ...
१८ – बुद्धि द्वारा ग्रहण करो और मुख द्वरा एक दो के गुणगान करो ...
१९ – होली अर्थात पवित्रता की स्टेज पर ठहरना और बाप के संग के रंगे रहना ....
२० – पवित्र आत्माएं अर्थात कहाँ भी किसी रीती झुकाव नही ....
२१ कैसा भी वायुमंडल विकारी हो लेकिन स्वयं की वुर्ती निर्विकारी होनी चाहिए ...
२२ – निराकार और साकार दोनों को सदा साथ में रखो ....
२३ – सदा बाप को साथ रखने लिए अपने को मर्यादा की लकीर के अन्दर रखो, लकीर के बाहर न निकलो ...
२४ - उपकारी पर उपकार करना बड़ी बात नही अपकारी पर भी उपकार करो ...
05 08 2016
पवित्रता
२५ – आप के सिर्फ एक सकेंड के शुद्ध संकल्प की शक्ति से माया छुइमुई माफिक मुर्छित हो जानी चाहिए ....
२६ – अगर अपनी वुर्ती श्रेष्ठ है तो इसके आगे प्रवुर्ती वा परिस्थिति कोई भी प्रकार का वार कर नही सकती ...
२७ – लगाव वाले को सलाम भरना ही पडेगा और लगाव वाले सम्पूर्ण फस्ट जन्म का राज्य भाग्य पा न सके ....
२८ – सदा सतोप्रधान आत्मिक द्रष्टी, सदा हर संकल्प, हर बोल व् कर्म में प्योरिटी की झलक दिखाई पड़े ...
२९ – सुक्ष्मातित सूक्ष्म पापों का भी ज्ञाता बनो ...
३० – अपना टाइम टेबल सेट करो व् स्वयं ही स्वयं का शिक्षक बन स्वयं को होमवर्क दो ...
३१ – देहधारी प्रति सोचना व् संकल्प करना यह बुरा है, देहधारी को देहधारी समझ उससे बोलना यह भी बुरा है ...
३२ – साजन वा सजनी के रूप में भी बाप से सजनी बन व् साजन बनकर अतिइन्द्रिय सुख का जो रस सदा – सदा काल स्मुर्ती में और समर्थि में लाने वाला है ...
३३ – मास्टर सर्वशक्तिवान के आगे अभी तक भी वुर्ती और द्रष्टी का चंचल होना शोभता नही है ...
३४ – मस्तक में मणी के बजाय सांप को क्यों देखते हो ...
३५ - क्या आत्मा आत्मा भाई भाई की वुर्ती सदा कायम रहती है ? ...
३६ पहले यह देखो की क्या अपना दिव्य बुद्धि रूपी नेत्र अपने पास कायम है ? ...
06 08 2015
पवित्रता
३७ – पहला पाठ, पवित्र भव व् योगी भव को प्रक्टिकल स्वरूप में लाओ ...
३८ – हर कदम मर्यादा अनुकूल स्मुर्ती वुर्ती और द्रष्टी भी सदा ही मर्यादा प्रमाण हो ...
३९ – झूठ बोलना, चोरी करना, ठगी करना व् धोखा देना इसको भी हिंसा व् महापाप कहा जाता है ...
४० प्रवुर्ती होते हुए भी स्वयं निवृत रहो ...
४१ – पहले अपने आपस से पूछो की अपने शरीर घर को पवित्र बनाया है ? संकल्प को, बुद्धि को, नयनों को और मुख को रूहानी अर्थात पवित्र बनाया है ? ...
४२ – जहाँ अशुद्धि होती है है वहां ही अशुद्ध विकार अथवा भुत प्रवेश होता है ...
४३ – अब तक साधारण समझ जो किया उसको बीती सो बीती करो अर्थात अपने ऊपर रहम करो ...
४४ – अभी अपने को सिद्ध करना अर्थात बाप द्वरा जन्म जन्मान्तर के लिए सर्व सिद्धियों की प्राप्ति से वंचित होना ...
४५ – कोई भी देहधारी के संकल्प से व् कर्म से फंसना अर्थात अपनी की हुई अब तक की कमाई को खत्म करना ...
४७ – अब का चलाना अर्थात बार बार चिल्लाना ...
४८ – प्योरिटी सिर्फ ब्रहमचर्य व्रत को नही कहा जाता, संकल्प, स्वभाव, संस्कार में भी प्यूरिटी ....
07 08 2016
पवित्रता
४९ – सैदेव यह स्मुर्ती में रखो की मैं हाईएस्ट और होलीएस्ट हूँ ...
५० – सम्पूर्ण पवित्रता अर्थात संकल्प व् स्वप्न में भी अपवित्रता का अंशमात्र भी न हो ..
५१ – अंतिम आहुति अर्थात संकल्प स्वपन में भी देहभान का मैं पन न हो ...
५२ – सदा भाग्य की निशानी है पवित्रता ...
५३ – अगर संकल्प मात्र भी स्वप्न मात्र भी कोई देहधारी आत्मा तरफ झुकाव हुआ तो सदा सुहागिन के लिए महापाप गिन जाता है ...
५४ – सम्पूर्ण पवित्रता ही आपका श्रुंगार है ...
५५ – सदा शुद्ध संकल्प का भोजन, बुद्धि द्वरा गुण धारण करें वाले होली हंस बनो ...
५६ – व्यर्थ संकल्प के कारण तन और मन दोनों कमजोर हो जाते है ...
५७ – पहला अटेंशन अमूर्तवेले की पावर फूल स्थिति का सैटिंग करो ...
५८ – ज्ञानी तू आत्मा हर बात के स्वरूप का अनुभव करती है ...
५९ – प्योर बुद्धि का आधार है बुद्धि द्वारा बाप को जान, बुद्धि को भी बाप के आगे समर्पण करना ...
६० – शुद्धपन के संस्कार को मेरा कहना, यह महापाप है, चोरी है और ठगी है ...
08 08 2016
पवित्रता
६१ – पवित्र प्रवुर्ती में बिजी रहने से व्यर्थ संकल्पों से निवुर्ती होगी ...
६२ – ब्राहमण जीवन का विशेष कर्म ही है --- लौकिक को अलौकिक बनाना ...
६३ – हम सब एक बाप की सन्तान रूहानी भाई है – यह अलौकिक द्रष्टी
से लौकिक द्रष्टी जिसके आधार से विकारों की उत्पति होती है, वह बिज ही समाप्त हो जाता है ...
६४ – लौकिक देह अर्थात शरीर में अलौकिक आत्मा को देखो ...
६५ पहला पाठ आत्मिक स्मुर्ती का पकका करो ...
६६ – निरंतर आत्माभिमानी. जिससे कर्म - इन्द्रिय के ऊपर विजय हो जाए, हरेक कर्म – इन्द्रिय सतोप्रधान स्वच्छ हो जाए ...
६७ – अगर कोई भी सब्जेक्ट में सम्पूर्ण विजयी नही बनते तो परम पूज्य नही बन सकते ...
६८ – जितना ओनेस्ट होगा उतना ही होलीएस्ट होगा ...
६९ – प्यूरिटी की पर्सनालिटी स्वयं ही सर्व के सिर झुकाएगी ...
७० – अपनी वरदानी महादानी वुर्ती से वायब्रेशन और वायुमंडल को परिवर्तन करो ....
७१ – वुर्ती की चंचलता रजिस्टर को दागी बना देती है ...
७२ – बाल ब्रहमचारी वर्तमान समय भी पूज्य है और भविष्य में भी पूज्य है ...
09 08 2016
पवित्रता
७३ – ब्राहमण जन्म की मुख्य पर्सनालिटी है प्यूरिटी ...
७४ – प्यूरिटी ही इस भारत देश की महानता है ... प्यूरिटी ही विश्व परिवर्तन का आधार है ...
७५ – ब्राह्मण बनना अर्थात अपवित्रता का त्याग और पवित्रता का श्रेष्ठ भाग्य ...
७६ - अब होलीहंस बनते ही तो भविष्य में हिज होलीनेस कहलाते हो ...
७७ – पवित्रता की ही महानता और पवित्रता की मान्यता है ...
७८ – परम पूज्य आत्मा ही इष्टदेव और अष्टदेव है ...
७९ – अलबेलेपन की नींद से भी जग जाओ, इसमें भी सोया तो खोया ...
८० – प्यूरिटी की ब्यूटी में फस्ट प्राइज़ पाओ ..
८१ – सिर्फ यह एक संकल्प रखो – अनादी – आदि रियल रूप पवित्र आत्मा हूँ ...
८२ – महेनत का मेकप करना अभी यह छोड़ो और नैचरल ब्यूटी में आ जाओ ...
८३ – सदा चेकिंग की मशीन को यूज करो ...
८४ – ब्राहमणों का सबसे पहला अधिकार है पवित्रता ...
10 08 2016
पवित्रता
८५ – सबसे बड़े ते बड़ी महानता है पावन बनना ...
८६ – पवित्रता ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ श्रुंगार ...
८७ – ब्राह्मण जीवन का जियदान ही पवित्रता है ...
८८ – आपका स्वमान क्या है ?? .. में परम पवित्र आत्मा हूँ ...
८९ – सदा आपस की बधाई द्वरा रावन को विदाय दे देना है ...
९० – खुद सेफ रहो लेकिन दूसरों को सर्टिफिकेट फाइनल नही दो ...
९१ – सदा बापदादा के साथ होली मनाने वाले होली हंस बनो ...
९२ – जलाना ही मनाना और बनना है ...
९३ – पवित्रता की धारणा ही धर्म सत्ता है ...
९४ – पवित्रता की अति सूक्ष्म परिभाषा समझो ....
९५ - पवित्रता के सम्पूर्णता की परिभाषा है ----- सदा स्वयं में भी सुख शांति स्वरूप और दूसरों को भी सुख शांति की प्राप्ति का अनुभव करने वाले ..
९६ – मनसा पवित्रता की शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है ---- प्रकुर्ती का भी परिवर्तन ....
11 08 2016
पवित्रता
९७ – थोड़ी सी कमजोरी सदा के लिए धर्म और कर्म को छुड़ा देती है ...
९८ – पवित्रता ही स्वच्छता है ...
९९ – सदा माँ ब्रह्मा के वरदान और लोरी याद रखो ..
१०० - ब्रह्मा कुमार का अर्थ ही है --- पवित्र कुमार ...
१०१ – सैदेव हरेक नारी शरीरधारी आत्मा को शक्तिरूप, जगतमाता का रूप, देवी का रूप देखना ...
१०२ – चारों सब्जेक्ट द्वरा विद्धि और सिद्धि प्राप्त करें वाले परम पूज्य आत्मा बनो ...
१०३ – ब्राहमण जीवन का मुख्य आधार कहो, नवीनता कहो, अलौकिकता कहो, जीवन का श्रुन्गार कहो, वह है ही – पवित्रता ....
१०४ – श्रेष्ठ परिवार है तो सदा श्रेष्ठ द्रष्टी रखो, क्योंकि यह महापाप कभी प्राप्ति स्वरूप का अनुभव करा नही सकता ...
१०५ – जैसे नाम है बाल ब्रहमचारिणी, वैसे संकल्प भी ऐसा पवित्र हो ...
१०६ – आप एक एक होलीहंस की पवित्रता की झलक चलन से दिखाई दे ...
१०७ – सदा मस्तक पर तिन विशेष अधिकार की तिन लकीरधारी बनो ..
१०८ – अपने चरित्र के चित्र में तिन बातों को देखते रहो ..
12 08 2016
पवित्रता
१०९ – अपने में तिन विशेषताओं के साथ तिन लाइट की गति को भी देखो ...
११० – जब तक अपवित्रता को सम्पूर्ण समाप्त नही किया है तब तक पवित्रता का रंग चढ़ नही सकता ...
१११ – व्यक्ति वा व्यक्त भाव में प्राभावित होना, प्रभावित होना नही लेकिन बरबाद होना है ...
११२ – पवित्रता के भिन्न भिन्न रूपों को अच्छी तरह से जानो, स्वयं के प्रति कड़ी द्रष्टी रखो, चलाओ नही ...
११३ – अपने को ब्राह्मण कहता है, ब्राह्मण आत्मा पर व्यर्थ वा विकारी द्रष्टी, वुर्ती जाती है --- तो यह कुल कलंकित की बात है ...
११४ – कामजीत अर्थात हद की कामनाओं जीत ...
११५ – अभी सब का एक इच्छा मातरम अविधा का आवाज हो तब औरों की इच्छाएं पूर्ण कर सकेंगे ...
११६ – पांच तत्व और पांच विकार को दासी बनाने वाले प्रकुर्तीजीत और मायाजीत बनो ...
११७ – सबको पांच विकारों के सदा के लिए समाप्त करें का संकल्प करना --- यह अंतिम टुब्बी का महत्व है ...
११८ – चारों तरफ की आग मिटाने वाले शीतलता का वरदान देने वाले शीतला देवी बन जाओ ...
११९ – निर्भय रहो और अपने अनादी आदि स्वरूप में स्थित रहो ...
१२० – शीतल योगी बनो .... १२१ – पवित्रता हमारा जन्म सिद्धि अधिकार है ...
13 08 2016
पवित्रता
१२२ - तीन प्रकार की होली मनाओ ...
१२३ – चार प्रकार की कामनाओं को समाप्त करना अर्थात सदा के लिए दुःख अशांति को जितना ...
१२४ – रॉयल कामनाओं पर विजयी बनो ..
१२५ – होलो अर्थात सदा हेपी ...
१२६ – हर सकेंड ख़ुशी की लहरों में लहराने वाले ...
१२७ – जिस के लिए आये हो उस लक्ष्य से किनारे न हो जाओ ...
१२८ – होली अर्थात हंसबुद्धि, हंसवुर्ती, हंसद्रष्टी, और हंसमुख वाले ...
१२९ – बहुत काल के अटेंशन के फलस्वरूप श्रेष्ठ प्राप्ति की प्रालब्ध है ...
१३० – न सिर्फ कर्म से लेकिन मन वाणी कर्म तीनों से पवित्र बनना ही है ...
१३१ – पवित्रता को माता कहते है और सुख शांति उनके बच्चे है ..
१३२ – यह संगमयुग होली जीवन का युग है ...
१३३ – होली बनने के लिए पहले पुराने संस्कार, पुरानी स्मुर्तियाँ सभी को याग अग्नि से जलाओ ...
14 08 2016
पवित्रता
१३४ – चार प्रकार की होली मनाओ ...
१३५ – मस्तक पर तीन विशेष रेखाएं चमक रही है ...
१३६ – पवित्रता का सम्पूर्ण रूप है --- ब्रह्मचारी के साथ साथ ब्रहमाचारी बनना ...
१३७ – बुद्धि को कोई आत्मा का साथ वा गुण वा कोई विशेषता आकर्षित नही करे --- इसको कहते है पवित्रता ...
१३८ – पवित्रता निजी संस्कार के रूप में अनुभव करना ...
१३९ – पवित्रता अर्थात स्वच्छता ...
१४० – नि:स्वार्थ, निर्विकल्पी स्थिति से सेवा करना सफलता का आधार है ...
१४१ – पूजनीय आत्माएं ही विश्व के लिए विशेष जहान के नूर बन जाते है ....
१४२ - ब्राह्मण बनना अर्थात पूज्य बनना ...
१४३ – जितना सर्व प्रकार की पवित्रता को अपनाते है उतना ही सर्व प्रकार के पूजनीय बनते है ...
१४४ – पवित्र आत्मा सदा दिनचर्या के हर कर्म में यथार्त, युक्तियुक्त रहती है ...
१४५ – विधिपूर्वक न चलना, कोई भी दिनचर्या में ऊपर निचे होना --- यह भी अपवित्रता के अंश में गिनती होता है ...
15 08 2016
पवित्रता
१४६ – ब्रहमचारी रहे या निर्मोही हो गये --- सिर्फ इसको ही पवित्रता नही कहेंगे ...
१४७ – दृढ संकल्प की तीली से आत्मिक बाम्ब की आतीशबाजी जला कर रावण का पुराना कर्ज समाप्त करो ...
१४८ – स्वच्छता ही महानता है ...
१४९ – पवित्रता का फाउंडेशन २१ जन्मों का फाउंडेशन है ...
१५० – पवित्रता माया के अनेक विध्नों से बचने की छत्रछाया है
१५१ - पवित्रता की द्रष्टी वुर्ती साधारणा शक्ति नही है ...
१५२ – पवित्र आत्माएं सदा सिद्धि स्वरूप है और सदा की प्राप्ति कराने वाली है ...
१५३ – पवित्रता की शक्ति की महानता को जान पवित्र अर्थात पूज्य देव आत्माएं अभी से बनो ...
१५४ – दुनिया जिसको असम्भव समझती है उसको आप सहज अनुभव करें वाले हो ...
१५५ – माया का काम है आना और आपका काम है विजय प्राप्त करना ...
१५६ – सदा अपने को श्रुन्गार हुए होली हंस समझो ...
१५७ – होलीहंस अर्थात समय प्रमाण विशेषता वा गुण को परख कर वही समय पर यूज करें वाले ...
16 08 2016
पवित्रता
१५८ – होली हंस अर्थात दो विशेषताओं से सम्पन्न ....
१५९ – होली हंस अर्थात सदा पावन संकल्पधारी ...
१६० – यह चेक करो की अपवित्रता को सिर्फ मारा है या जलाया है ??? ..
१६१ – सदा अपने को वरदाता बाप का वरदानों से सम्पन्न बच्चा समझो ...
१६२ – जो बच्चे एकव्रता आदि से अब तक है वही वरदाता को अति प्रिय है ...
१६३ – सदा एक शब्द का ही प्रेमी बनो ...
१६४ – एक जन्म स्वमानधारी, सारा कल्प सम्मानधारी ..
१६५ – एक जन्म पवित्र ब्राह्मण बनते हो लेकिन अनेक जन्म देवता रूप में राज्य करते वा पूज्य बनते हो ..
१६६ – होलीहंस अर्थात समर्थ और व्यर्थ को परखने वाले ...
१६७ – होली अर्थात ज्वालामुखी बन आसुरी संस्कार, आसुरी स्वभाव सबकुछ भस्म करें वाले ...
१६८ – सम्पूर्ण स्वच्छता वा पवित्रता – यही इस संगमयुग में सबका लक्ष्य है ...
१६९ – होली हंस अर्थात तन मन दिल और सबंध से बेदाग़ ...
17 08 2016
पवित्रता
१७० – किसी तरफ भी मन भटकता है तो भटकना अर्थात अस्वच्छता ...
१७१ – अगर कोई भी स्वार्थ से सेवा करते हो तो उसको सच्ची सेवा नही कहेंगे ...
१७२ – सच तो बिठो नच ...
१७३ – पवित्र अर्थात विशेष आत्मा विशेष आत्मा अर्थात सरस्वती माँ जैसे वीणा वादिनी और हंस वाहिनी ...
१७४ – होलीहंस अर्थात दिव्य द्रष्टि और दिव्य बुद्धि वाले सिद्धि स्वरूप ....
१७५ – सिद्धि कोई बड़ी चीज नही है, सिर्फ दिव्य बुद्धि की सफाई है ...
१७६ – पवित्रता ब्राह्मण जीवन की चमक है ...
१७७ – होलीहंस अर्थात सर्वशक्तियों को प्रक्टिकल में लाने वाले और सदा पवित्र रहने वाले ...
१७८ – होलीहंस अर्थात नेगेटिव को छोड़ दे और पोजिटिव को धारणा करे ...
१७९ – होली हंस अर्थात हर आत्मा के प्रति सदा शुभ भावना और शुभ कामना रखने वाले ...
१८० – होलीहंस अर्थात स्व परिवर्तन द्वरा औरों को परिवर्तन करें वाले ...
१८१ – ब्राहमण अर्थात पवित्र, पवित्र अर्थात सफल तपस्वी ....
१८२ – पवित्रता की पर्सनालिटी अर्थात हर कर्म में महानता और विशेषता ...
18 08 2016
पवित्रता
१८३ – प्यूरिटी अर्थात रोयल्टी, रोयल्टी अर्थात रियल्टी, रियल्टी अर्थात सत्यता ....
१८४ – रोयल्टी अर्थात चित से भी और नैन चैन से भी सदा हर्षित ...
१८५ – रॉयल अर्थात रियल प्यार वाली आत्मा ...
१८६ – रोयल्टी अर्थात मांगने का अंश मात्र भी संस्कार नही ...
१८७ – रोयल सत्यता और सभ्यता की दैवी ...
१८८ – पवित्र अर्थात तन से भी ब्रहमचारी, सबंध में भी ब्रहमचारी और संस्कार में भी ब्रहमचारी ...
१८९ – पूज्य अर्थात कभी भी किसी भी वस्तु के पीछे, व्यक्ति के पीछे नही झुकने वाले ...
१९० – पूज्य अर्थात इष्ट, इष्ट अर्थात विधिपूर्वक पूजा के योग्य ...
१९१ – पवित्र अर्थात जीवनमुक्त ...
१९२ – पवित्र अर्थात मायाजीत और सदा बाप के समीप संग में रहें वाले ...
१९३ – पवित्र अर्थात तीनों कालों में रूहानी रॉयल फेमिली वाले ...
१९४ – पवित्र अर्थात सच्चा हीरो ..
19 08 2016
पवित्रता
१९५ – पवित्र अर्थात रोयल, रोयल अर्थात सदा तुप्त ...
१९६ – रोयल अर्थात वुर्ती में सदा शुभ भावना, द्रष्टी में फरिश्ता रूप, और कृति में सुख की लेने देन ..
१९७ – पवित्र अर्थात प्रसन्नचित अर्थात बुराई को बदल अच्छाई में परिवर्तन करें वाले ...
१९८ – कर्म की गृह्य गति सामने रखो और छोटे छोटे तथा सूक्ष्म पापों को जानो ...
१९९ – ब्राहमण अर्थात जन्मते ही व्रतधारी ...
२०० – सम्पुर्ण पवित्रता अर्थात अन्धकार मिटाने वाली रौशनी ...
२०१ – प्रतिज्ञा करनी है तो सम्पूर्ण प्रतिज्ञा करो ...
२०२ – यही अच्छी तरह याद रखो की हम चारों समय हाईएस्ट और होलीएस्ट है ....
२०३ – पुरुषार्थ का लक्ष्य सम्पूर्ण पवित्रता का ही है ...
२०४ – ब्राह्मण अर्थात पवित्र बन शरीर और प्रकुर्ती को भी पवित्र बनाने वाले ...
२०५ – बाप के संग का रंग जितना पक्का लगता है उतना ही होली बन जाते है, सम्पुर्ण पवित्र बन जाते हो ...
२०६ – बाप को कम्पेनियन तो बनाया है लेकिन कम्पेनियन को कम्बाइन रूप में अनुभव करो ..
20 08 2016
पवित्रता
२०७ – अपने निजी संस्कार, निजी स्वभाव इमर्ज करो तो पुराने संस्कार और स्वभाव स्वत: ही मर्ज हो जायेंगे ...
२०८ – सदा यही सोचो की अनेक बार मैं ही बनी हूँ और मुझे ही बनना ही है ...
२०९ - सबसे बड़ी ते बड़ी प्राप्ति --- बाप मिला, सब कुछ मिला ....
२१० – सदा बाप के साथ रहें से मायाजीत भी सदा सहज होंगे ...
२११ – पवित्रता के आधार से ही नम्बर वन बनेगे ...
२१२ – मायाजित समर्थ सम्राट ...
२१३ – स्वराज्य अर्थात अखंड सुख शांति सम्पति सम्पन्न सम्राज्य ...
२१४ – बहुतकाल ले स्वराज्य का फल है बहुतकल का राज्य ...
२१५ – सबसे महान बनने का मुख्य आधार पवित्रता की धारणा ...
२१६ – फाउंडेशन सदा अचल अडोल रहना ही ब्राह्मण जीवन का सुख प्राप्त करना है ...
२१७ – पवित्रता किसी न किसी स्टेज में अचल नही रहती तो किस रूप की पवित्रता की हलचल है उसको उसको चेक करो ..
२१८ – स्व को सकेंड में व्यर्थ सोचने, देखने, बोलने और करने में फूल स्टॉप लगाकर परिवर्तन करना ...
२१९ – स्वयं बदलना ही स्वयं को आगे बढ़ाना है ..
21 08 2016
पवित्रता
२२० – पवित्रता का अर्थ ही है --- सदा संकल्प, बोल, कर्म, सबंध और सम्पर्क में तिन बिंदु का महत्व हर समय धारण करना ...
२२१ – मैं परम पूज्य आत्मा हूँ --- इस स्मुर्ती से पवित्रता का फाउंडेशन मजबूत करो .....
२२२ – पवित्रता ही श्रेष्ठता है .. पवित्रता ही पूज्य है ...
२२३ – साधारण कर्मे में भी विशेषता हो ...
२२४ – होली हंस अर्थात मन बुद्धि स्वच्छ ...
२२५ – सदा यह याद रखो की मेरा बिना बाप कुछ कर नही सकते और बाप बिना मैं कुछ कर सकता ...
२२६ – वेस्ट को बेस्ट बनाना अर्थात होलीहंस बनना ...
२२७ – प्योरिटी की रोयल्टी ही ब्राह्मण जीवन की विशेषता है ...
२२८ कुमारी जीवन अर्थात महान पवित्र जीवन ...
२२९ – कभी मनसे, बुद्धि से, संकल्प से बाप के बेवफा नही बनना ...
२३० – सदा अपनी चारों कालों की पर्सनालिटी को देखते रहो और उनका स्वरूप बनते चलो
२३१ - समय समाप्त होने के पहले बहुत काल का मायाजीत बनने का अभ्यास चाहिए ...
22 08 2016
पवित्रता
२३२ – पवित्रता की निशानी है स्वच्छता और सत्यता, व्यर्थ संकल्प भी अपवित्रता है ....
२३३ – कुमारिया अर्थात पवित्रता की परिभाषा ...
२३४ – कुमार अर्थात पवित्र देव, देव आत्मा ...
२३५ – पवित्र अर्थात न स्वयं में व्यर्थ संकल्प चलने देगा और न दूसरों के चलने के निमित बनेगा ...
२३६ – मुल फाउंडेशन है अपने संकल्प को शुद्ध बनाओ, ज्ञानस्वरूप बनाओ, शक्तिस्वरूप बनाओ ...
२३७ – जब कोई भी विशेषता को देखते है, गुणों को देखते है, सेवा को देखते है दाता को नही भूलो ...
२३८ – अगर दिल में परमात्म प्यार, परमात्मा शक्तियाँ, परमात्मा ज्ञान फूल है, जरा भी खाली नही है तो कभी भी किसी भी तरफ लगाव या स्नेह जा नही सकता ....
२३९ – फलक से कह सकते है की पवित्रता तो हमारा स्वधर्म है ...
२४० – अगर पवित्रता स्वपन मात्र भी हिलाती है, हलचल में आती है तो समझो नम्बर वन फाउंडेशन कच्चा है ...
२४१ – माया को चोर गेट बनने नही देना ...
२४२ – चाहिए चाहिए की रोयल मांग का त्याग करो ...
२४३ – माया के अनेक फेस रूप पहचान कर उसके चक्रव्यूह के बचकर रहो ...
23 08 2016
पवित्रता
२४४ – पहले नम्बर के रोयल फैमिली के आना ये भी श्रेष्ठ पुरुषार्थ है ...
२४५ – संकल्प मात्र भी पवित्रता के व्रत में रहना अर्थात बाप के दिलतख़्तनशीं बनना ...
२४६ – ये मरना मरना नही है, ये मरना सदा के लिए जीना है ... २४७ – काम चलाऊ नही बनना, नही तो पूजा भी ऐसी ही होगी ...
२४८ – पवित्रता के आधार पर सत्यता का स्वरूप स्वत: और सहज सदा होता है ...
२४९ – सत्यता अर्थात संकल्प बोल कर्म सबंध सम्पर्क सबमें दिव्यता का अनुभव ...
२५० – सत्यता की शक्ति धारण करें में सहनशक्ति की धारणा करो ...
२५१ – सत्यता की शक्ति से चलने वाले ही सच्चे महारथी ....
२५२ – अल्प काल का मजा सजा का भागी बना देगा ...
२५३ – तिन बातें याद रखो --- पवित्रता सत्यता और दिव्यता ...
२५४ – सबसे बड़े ते बड़ी पर्सनालिटी है --- स्वपन वा संकल्प में भी सम्पूर्ण प्यूरिटी की पर्सनालिटी ....
२५५ – पर्सनालिटी वाले अर्थात प्रसन्नचित वाले ....
24 08 2016
पवित्रता
२५६ – परमात्मा प्यार में लवलीन रहकर माया को ख़ुशी ख़ुशी से विदाई देने वाले बनो ...
२५७ – सदा स्नेह की शक्ति में रहो तो सदा के लिए महेनत से मुक्त हो जायेंगे ....
२५८ – सदा याद रखो – मैं हू होलीएस्ट हाईएस्ट और रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड ...
२५९ – जो परमात्मा के प्यारे बनते है वह विश्व के प्यारे बनते है ...
२६० – होली मनाना अर्थात होलीहेस्ट बाप के साथ होली बनकर रहना ...
२६१ – आप परमात्मा बच्चे जो बाप के साथ होंगे वह सेफ रहेंगे, अगर और कहाँ बुद्धि होगी तो कुछ न कुछ सेक लगेगा ...
२६२ – ब्रह्माकुमार वा ब्रह्माकुमारी अर्थात भगवान को जीवन साथी बनाके रखने वाले ...
२६३ – सदा बुद्धि में संगमयुग के सुख और सुहेजों को इमर्ज रखो ....
२६४ - परमात्मा राम की सच्ची सीता बन कर रहो ...
२६५ – दिल में रहें वाले दिल से कभी दूर नहो होते ...
२६६ – सर्व सबंध का समय प्रति समय अनुभव करते रहो ...
२६७ – बाप को साथी बनाए फ्लाई करो तो बड़ा मजा आएगा ...
२६८ – आज बापदादा सभी से यह गिफ्ट लेने चाहते है की क्रोध को छोड़ो लेकिन क्रोध का अंश मात्र भी नही रहे ...
२६९ – बच्चों में से एक ग्रुप चाहिए, जो सिर्फ ब्रह्मचारी नही लेकिन ब्रह्माचारी हो ...
२७० – आप की पवित्रता की शक्ति विश्व के जड, चैतन्य सर्व को पवित्र बना देती है ...
२७१ – ब्राहमण जीवन माना पवित्र आहार, पवित्र व्यवहार और पवित्र विचार ...
ओमशांति ...
ज्यादा पवित्रता की गुह्यता के लिए सम्पूर्ण पवित्रता की बुक को पढ़ सकते हो .. ओमशांति ... वाह मेरे बाबा वाह ...