| एक और बिल्डर ने करोड़ों डकारे | |||
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अनिल निगम, नोएडा आशियाने के आकांक्षी भोले-भाले लोगों को ठगने की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। ग्रीन सिटी के नाम से टाउनशिप विकसित करने का हवाला देकर एक बिल्डर देश के सैकड़ों लोगों का पैसा पहले ही डकार चुका है। अभी लोग इस सदमे से उभरे भी नहीं हैं कि नीतिश्री इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नामक बिल्डर पर देश के सैकड़ों लोगों का करोड़ों रुपया हड़पने का आरोप लग गया है। मकान व प्लॉट के नाम पर लुटे चौदह लोगों ने इसकी शिकायत आर्थिक अपराध शाखा में की है। नोएडा के सेक्टर चार स्थित बिल्डर नीतिश्री इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने वर्ष 2005 में गाजियाबाद के एनएच-24 स्थित बमहेटा व शाहपुर गांव की जमीन पर शौर्यपुरम नामक टाउनशिप विकसित करने की प्री-लांचिंग की थी। दो सौ एकड़ जमीन में प्रस्तावित इस सिटी में फ्लैट व प्लॉट दोनों विकसित किए जाने थे। उसने अलग-अलग श्रेणी में 2002 प्लॉट व लगभग एक दर्जन टावर के तहत करीब दो सौ फ्लैट बनाने की योजना लांच की थी। जमीन पर टाउनशिप प्राप्त किए बिना ही बिल्डर ने 18 नवंबर 2006 को भूमि पूजन भी कर दिया और प्लॉट एवं फ्लैटों की धड़ाधड़ बुकिंग शुरू कर दी। लोगों को प्रभाव में लेने के लिए न केवल टाउनशिप का लेआउट प्लान दिखाना शुरू कर दिया गया, बल्कि कागजों में प्लॉट व फ्लैट नंबर भी आवंटित कर दिए गए। लोगों से किए गए एग्रीमेंट में प्लॉट पर कब्जा जून 2009 में और फ्लैट का कब्जा दिसंबर 2009 में देने का वायदा किया गया। जून का महीना गुजरने के बावजूद बिल्डर के पास प्रोजेक्ट का लाईसेंस तक नहीं है। अनुमान के अनुसार इस स्कीम के तहत देश के विभिन्न शहरों के सैकड़ों लोगों ने शौर्यपुरम टाउनशिप में आशियाने के लिए एक अरब दस करोड़ रुपये जमा कराए हैं। खुद को ठगा महसूस करने पर लोगों में पैसे को लेकर बेचैनी बढ़ गई और उन्होंने बिल्डर से पैसे वापस करने की मांग की, लेकिन पैसा रिफंड न होता देख उन्होंने इसकी शिकायत आर्थिक अपराध शाखा के अपर आयुक्त से की है। दिल्ली निवासी निधी पहावा ने 175 वर्ग गज के प्लॉट की बुकिंग अगस्त 2007 में की थी। वह सात लाख आठ हजार रुपये दे चुकी हैं। कंपनी ने उन्हें ई-1642 प्लॉट नंबर के नाम से फर्जी आवंटन पत्र भी जारी कर दिया था। उन्होंने बताया कि कंपनी ने उनके साथ धोखाधड़ी की है, अब उन्हें ब्याज सहित पैसा वापस किया जाए। फ्लैट की बुकिंग कराने वाले लखनऊ निवासी प्रशांत कुमार और गौरव राकेश की कहानी और भी अधिक दर्दनाक है। वे फरवरी 2007 में एक्सिस बैंक से 22 लाख 91 हजार और 22 लाख 33 हजार रुपये फाइनेंस करा कर कंपनी को भुगतान कर चुके हैं। नौकरी पेशा दोनों लोगों की तनख्वाह से हर महीने किस्त भी कट रही है। उनका आरोप है कि बिल्डर के पास मिलने जाते हैं तो वह कहता है कि प्रयास कर रहे हैं,अन्यथा किसी और प्रोजेक्ट में आपको शिफ्ट कर देंगे। अब तो उनका बिल्डर से भरोसा ही उठ गया है। अब हर हाल में उन्हें पैसा वापस चाहिए। दिल्ली निवासी कमल सचदेवा और विष्णु कुमार ने भी दो साल पहले 175 गज वर्ग गज के अलग-अलग प्लॉट बुक कराए थे। दोनों क्रमश:छह लाख तीस हजार और छह लाख चालीस हजार रुपये भुगतान कर चुके हैं। कंपनी ने उन्हें आवंटन पत्र तो जारी कर दिए हैं, पर पिछले एक साल से वे सिर्फ चक्कर काट रहे हैं और उन्हें कुछ भी नहीं बताया जा रहा। गुड़गांव निवासी अनिक आनंद और नोएडा वासी मनीष गुप्ता ने भी वर्ष 2006 में प्लॉट बुक कराए थे। वे क्रमश: छह लाख 71 हजार व पांच लाख 19 हजार रुपये जमा करा चुके हैं। उन्होंने बिल्डर पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आवंटन पत्र में कब्जा विलंब से मिलने पर बिल्डर ने उनको दस फीसदी प्रति वर्ष के हिसाब से ब्याज सहित वापस करने का वायदा किया था, लेकिन अब वह पैसा वापस करने की जगह उन्हें धमकी देकर कार्यालय से भगा देता है। इसी तरह से दिल्ली निवासी एचएस भाटिया, जसनीत कौर, कुलविंदर भाटिया, आशीष चोपड़ा, राजकुमारी, मनीष शर्मा, नवीन मेहता व रवि तनेता सहित सैकड़ों लोग आशियाना न मिलने से हताश व निराश हैं। नीतिश्री इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी की मीडिया हेड ब्रुशाली का कहना है कि उन्होंने लोगों के साथ कोई धोखाधड़ी नहीं की है। शौर्यपुरम प्रोजेक्ट के लिए साठ फीसदी जमीन उन्हें खरीदनी थी, जबकि चालीस प्रतिशत सरकार को अधिगृहीत करनी थी। सरकार ऐसा नहीं कर सकी। साथ ही मंदी आ गई। इसलिए काम पूरा नहीं हो सका। पैसे की व्यवस्था होते ही लोगों को उनकी राशि वापस कर दी जाएगी। लेकिन जमीन अपनी न होने के बावजूद कंपनी ने भूमि पूजन, प्लॉट व फ्लैट का आवंटन कैसे कर दिया, इसका वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई। |
| एक और बिल्डर ने करोड़ों डकारे | |||
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अनिल निगम, नोएडा आशियाने के आकांक्षी भोले-भाले लोगों को ठगने की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। ग्रीन सिटी के नाम से टाउनशिप विकसित करने का हवाला देकर एक बिल्डर देश के सैकड़ों लोगों का पैसा पहले ही डकार चुका है। अभी लोग इस सदमे से उभरे भी नहीं हैं कि नीतिश्री इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नामक बिल्डर पर देश के सैकड़ों लोगों का करोड़ों रुपया हड़पने का आरोप लग गया है। मकान व प्लॉट के नाम पर लुटे चौदह लोगों ने इसकी शिकायत आर्थिक अपराध शाखा में की है। नोएडा के सेक्टर चार स्थित बिल्डर नीतिश्री इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने वर्ष 2005 में गाजियाबाद के एनएच-24 स्थित बमहेटा व शाहपुर गांव की जमीन पर शौर्यपुरम नामक टाउनशिप विकसित करने की प्री-लांचिंग की थी। दो सौ एकड़ जमीन में प्रस्तावित इस सिटी में फ्लैट व प्लॉट दोनों विकसित किए जाने थे। उसने अलग-अलग श्रेणी में 2002 प्लॉट व लगभग एक दर्जन टावर के तहत करीब दो सौ फ्लैट बनाने की योजना लांच की थी। जमीन पर टाउनशिप प्राप्त किए बिना ही बिल्डर ने 18 नवंबर 2006 को भूमि पूजन भी कर दिया और प्लॉट एवं फ्लैटों की धड़ाधड़ बुकिंग शुरू कर दी। लोगों को प्रभाव में लेने के लिए न केवल टाउनशिप का लेआउट प्लान दिखाना शुरू कर दिया गया, बल्कि कागजों में प्लॉट व फ्लैट नंबर भी आवंटित कर दिए गए। लोगों से किए गए एग्रीमेंट में प्लॉट पर कब्जा जून 2009 में और फ्लैट का कब्जा दिसंबर 2009 में देने का वायदा किया गया। जून का महीना गुजरने के बावजूद बिल्डर के पास प्रोजेक्ट का लाईसेंस तक नहीं है। अनुमान के अनुसार इस स्कीम के तहत देश के विभिन्न शहरों के सैकड़ों लोगों ने शौर्यपुरम टाउनशिप में आशियाने के लिए एक अरब दस करोड़ रुपये जमा कराए हैं। खुद को ठगा महसूस करने पर लोगों में पैसे को लेकर बेचैनी बढ़ गई और उन्होंने बिल्डर से पैसे वापस करने की मांग की, लेकिन पैसा रिफंड न होता देख उन्होंने इसकी शिकायत आर्थिक अपराध शाखा के अपर आयुक्त से की है। दिल्ली निवासी निधी पहावा ने 175 वर्ग गज के प्लॉट की बुकिंग अगस्त 2007 में की थी। वह सात लाख आठ हजार रुपये दे चुकी हैं। कंपनी ने उन्हें ई-1642 प्लॉट नंबर के नाम से फर्जी आवंटन पत्र भी जारी कर दिया था। उन्होंने बताया कि कंपनी ने उनके साथ धोखाधड़ी की है, अब उन्हें ब्याज सहित पैसा वापस किया जाए। फ्लैट की बुकिंग कराने वाले लखनऊ निवासी प्रशांत कुमार और गौरव राकेश की कहानी और भी अधिक दर्दनाक है। वे फरवरी 2007 में एक्सिस बैंक से 22 लाख 91 हजार और 22 लाख 33 हजार रुपये फाइनेंस करा कर कंपनी को भुगतान कर चुके हैं। नौकरी पेशा दोनों लोगों की तनख्वाह से हर महीने किस्त भी कट रही है। उनका आरोप है कि बिल्डर के पास मिलने जाते हैं तो वह कहता है कि प्रयास कर रहे हैं,अन्यथा किसी और प्रोजेक्ट में आपको शिफ्ट कर देंगे। अब तो उनका बिल्डर से भरोसा ही उठ गया है। अब हर हाल में उन्हें पैसा वापस चाहिए। दिल्ली निवासी कमल सचदेवा और विष्णु कुमार ने भी दो साल पहले 175 गज वर्ग गज के अलग-अलग प्लॉट बुक कराए थे। दोनों क्रमश:छह लाख तीस हजार और छह लाख चालीस हजार रुपये भुगतान कर चुके हैं। कंपनी ने उन्हें आवंटन पत्र तो जारी कर दिए हैं, पर पिछले एक साल से वे सिर्फ चक्कर काट रहे हैं और उन्हें कुछ भी नहीं बताया जा रहा। गुड़गांव निवासी अनिक आनंद और नोएडा वासी मनीष गुप्ता ने भी वर्ष 2006 में प्लॉट बुक कराए थे। वे क्रमश: छह लाख 71 हजार व पांच लाख 19 हजार रुपये जमा करा चुके हैं। उन्होंने बिल्डर पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आवंटन पत्र में कब्जा विलंब से मिलने पर बिल्डर ने उनको दस फीसदी प्रति वर्ष के हिसाब से ब्याज सहित वापस करने का वायदा किया था, लेकिन अब वह पैसा वापस करने की जगह उन्हें धमकी देकर कार्यालय से भगा देता है। इसी तरह से दिल्ली निवासी एचएस भाटिया, जसनीत कौर, कुलविंदर भाटिया, आशीष चोपड़ा, राजकुमारी, मनीष शर्मा, नवीन मेहता व रवि तनेता सहित सैकड़ों लोग आशियाना न मिलने से हताश व निराश हैं। नीतिश्री इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी की मीडिया हेड ब्रुशाली का कहना है कि उन्होंने लोगों के साथ कोई धोखाधड़ी नहीं की है। शौर्यपुरम प्रोजेक्ट के लिए साठ फीसदी जमीन उन्हें खरीदनी थी, जबकि चालीस प्रतिशत सरकार को अधिगृहीत करनी थी। सरकार ऐसा नहीं कर सकी। साथ ही मंदी आ गई। इसलिए काम पूरा नहीं हो सका। पैसे की व्यवस्था होते ही लोगों को उनकी राशि वापस कर दी जाएगी। लेकिन जमीन अपनी न होने के बावजूद कंपनी ने भूमि पूजन, प्लॉट व फ्लैट का आवंटन कैसे कर दिया, इसका वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई। |