यहाँ इसके हिन्दी अनुवाद संस्करण के बारे में जानकारी दी गई है।
पिछले अंक में, हमने गणित का उत्सव मनाने की बात की थी! लेकिन क्या वार्षिक परीक्षाएँ आते ही इन उत्सवों का अचानक और निराशाजनक अन्त होना ज़रूरी है? आगे पढ़ें…
योगात्मक आकलन को सार्थक बनाना : आँचल चोमल और शिल्पी बनर्जी वार्षिक परीक्षा के उद्देश्य और उन्हें किस तरह से आयोजित किया जाए, इस पर चर्चा कर रही हैं। यह इस तरह हों जो पूरे वर्ष के दौरान विद्यार्थी के सीखने का आकलन करने में मदद करे — ताकि यह पता लगाया जा सके कि विद्यार्थी क्या जानता है, न कि यह खोजना कि वह क्या नहीं जानता !
योगात्मक आकलन को देखने का एक नज़रिया : रेशमा कृष्णन और अनुषा टी. आपको इस बात पर व्यावहारिक सुझाव दे रही हैं कि केवल पेन-एंड-पेपर (काग़ज़ और क़लम) परीक्षाओं पर निर्भर रहे बिना इस तरह के आकलन कैसे किए जाएँ।
भिन्नों को चित्रात्मक रूप में देखने का पेचीदा सच : कंचना सूर्यकुमार आपको 'पूर्ण' की भूमिका को समझने में मदद कर रही हैं, और क्षमा चक्रवर्ती की एक वर्कशीट कक्षा में इसे सुदृढ़ करने में आपकी मदद करेगी।
समय की सुई को घुमाना : गरिमा भट्ट कुछ नवाचारी घड़ी के डायल साझा कर रही हैं, जिन्होंने उन्हें आधे और चौथाई घण्टों के साथ कक्षा के सफ़र की शुरुआत करने में मदद की।
लीक से हटकर सोचना : स्वाती सरकार घनाभ और उनके नेट्स पर एक वर्कशीट के साथ कक्षा में मौजूद हैं।
पॉलीओमिनोज और क्यूब के नेट्स की खोज : ‘गणित का मज़ा’ सेक्शन में नेट्स का यह विषय जारी रहता है, जहाँ अस्मा मेमन पॉलीओमिनोज़ बनाने से लेकर यह खोजने की ओर बढ़ती हैं कि इनमें से कौन-सा 'क्यूब का नेट' हो सकता है।
और विषम संख्याओं का योग : मैथ स्पेस की ओर से 'टेन फ्रेम्स' पर आधारित एक पोस्टर और उससे जुड़ी वर्कशीट।
समीक्षा : एनरिच (nRich) वेबसाइट : स्नेहा टाइटस एनरिच वेबसाइट की समीक्षा कर रही हैं।
गिनती से परिचय : पद्मप्रिया शिराली इस पुलआउट (Pullout) के साथ इस अंक को समाप्त करती हैं।
आप यहाँ पूरे अंक को पढ़ सकते हैं।
कृपया अपनी प्रतिक्रिया हमारे साथ atrightang...@apu.edu.in पर साझा करें। हमें आपकी राय जानकर बेहद ख़ुशी होगी।