*६३७ . ।। अध्वान ।।*
*एकः स्वादु न भुञ्जीत*
*नैकः सुप्तेषु जागृयात् ।*
*एको न गच्छेदध्वानं*
*नैकश्चार्थान्प्रचिन्तयेत् ।।*
स्वादीष्ट पदार्थ एकट्यानेच खाऊ नये , सोबतचे सर्वजण झोपलेले असतांना एकालाच झोपेतून उठवू नये , आडमार्गाने एकट्यानेच जाऊ नये आणि गंभीर विषयावर एकट्यानेच चिंतन करु नये .
स्वादिष्ट वस्तु को अकेले ही नहीं खाना चाहिए , यदि साथ वाले सभी सो गये हों तो उन में से एक व्यक्ति को नहीं जगाना चाहिए । मार्ग में अकेले यात्रा नहीं करनी चाहिए तथा गूढ़ विषय पर अकेले हीं चिन्तन नहीं करना चाहिए ।
That which is sweet should not be eaten by a single man alone . When everyone is sleeping ,
an individual alone should not be awake. A traveller should not travel alone . Similarly a singleman by himself should not make monetary decisions .