मैं रथ का टूटा हुआ पहिया हूँ

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Kiran Deshpande

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Jul 19, 2009, 1:03:18 PM7/19/09
to AMBAJOGAI_PRIDE
मैं रथ का टूटा हुआ पहिया हूँ लेकिन मुझे फेंको मत !
क्या जाने कब इस दुरूह चक्रव्यूह में अक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती देता हुआ कोई दुस्साहसी अभिमन्यु आकर घिर जाय !
अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी बड़े-बड़े महारथी अकेली निहत्थी आवाज़ को अपने ब्रह्मास्त्रों से कुचल देना चाहें तब मैं रथ का टूटा हुआ पहिया उसके हाथों में ब्रह्मास्त्रों से लोहा ले सकता हूँ !
मैं रथ का टूटा पहिया हूँ लेकिन मुझे फेंको मत इतिहासों की सामूहिक गति सहसा झूठी पड़ जाने पर क्या जाने सच्चाई टूटे हुए पहियों का आश्रय ले !

--- A poem by Dharam Veer Bharati
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