पावसाच्या पहिल्या धारेनं सुखावले सारे
छत्र्या रेनकोट पिशव्या शोधू लागले सारे
उडाली धांदल उडाले पत्रे उधाणता वारे। पावसाचे।।
पाऊसही अवली।
ओतितो बादली ।
बेसावध जन। सापडिता।।
काही आनंदी।
काही कष्टी।
काही प्रेमिक। जनांमध्ये।।
पोरे ही खूष।
आया नाखूष।
कपडेही ओले। वाळता वाळेना।।
रस्ताही ओला।
सीटही ओले।
त्यातही फाटलेले। सारे चिंब।।
रस्तेही बाके।
खड्डेही बाके।
चिखलही बाका। मनपाचा।।
बसही फुल्ल।
रिक्षाही फुल्ल।
खोळंबती जन। दुकानाकडेने।।
ऑफिस सुटताना।
शाळा सुटताना।
अवचित घाला। पावसाचा।।
झाला खोळंबा।
झाली पंचाईत।
तरीही आनंदी। जनलोक।।
कुणा आठवे गेलेले बालपण।
कोणी रमे त्या रम्य आठवणीत।
कुणी शोधू पाहे लपलेले सूर्यबिंब।
कोणी लकी प्रेमिक आतूनही चिंब अन बाहेरूनी चिंब।।
एका छोट्या लेकराचा।
हा पहिला पाऊस।
तो उधाणून वाहे। याच्या चेहऱ्यावरून।।
आईही तृप्त।
बाबाही तृप्त।
कुटुंबच तृप्त। लेकराचे।।
चला चला उठा झणी।
करा पावसाची तयारी।
दारेही फुगली। बाथरूमची।।
पावसाच्या धुंदीत।
गेली संध्याकाळ।
घरोघरी तळण। कांदाभजीचे।।
उजाडता दिस।
मन प्रसन्न प्रसन्न।
आला की हो पाऊस। श्रांतवावया।।
ऑफिसाच्या गडबडीत।
सौ बोले श्रीयुतांना।
येत्या रविवारी गाठूया। आपण लोणावळा।।
श्री खूष।
सौ खूष।
पाऊसही खूष। करितो फजितवडा।।
अवली पावसाला।
भेटे त्याची सखी।
तो ना सोडे आता। तिचे अंतःपूर।।
तिची माझी भेट।
फक्त एका सिझनची।
तीही सोसूनी कळ। आठ आठ मासांची।।
तुम्ही जन लकी।
रोज पाहता सखी।
पुन्हा उतावीळ तुम्ही। भिजावया।।
जरा काढा थोडी कळ।
वेधशाळा घेते वळ।
तुम्ही घातलेल्या। अपशब्दांचे।।
आतुर त्या जनांना।
ना कळे विरह व्यथा।
कैसी ही माया। परमेश्वराची।।
पाऊस प्रेमिक।
रमला क्षणिक।
झोप उडवून। सर्वांची।।
आहो पाऊस राया।
मान्य तुमची माया।
परंतु आताथोडे । बाहेरही डोकवा।।
घामाने चिंब।
आतून बाहेरून।
जनही सारे। पिडलेले।।
तुम्ही रमलात।
रमणीमधेच।
तुमचा सीझन। लाटला सूर्याने।।
जनही दुःखी।
सूर्यही कोपे।
कसे साहू देवा। मन हे हळवे।।
आता करा त्वरा।
मान्सुनही आला।
सुरू झाल्या हाका। पेपरांमधी।।
तुम्ही फार थोर।
लावुनिया जोर।
वर्षवाव्या धारा। ढगांतुनी।।
बालक सुस्नात।
प्रेमिक सुस्नात।
धराही सुस्नात। करवून टाका।।
मिळून निसटावे।
निसटून मिळावे।
हाच खेळ सारा। संचिताचा।।
तेच संचित जोडून।
दोन्ही करही जोडून।
करितो विनंती। आता तरी कोसळा।।
आता तरी कोसळा।
सारे चिंब भिजवा।
नाहीतर पुन्हा गाईन। मोठे पावसाचे गाणे।।
ही धमकी नसे।
वा नसे चेतावणी।
आहे ही आर्तता। तुमच्या सुडोकूची।।