> Can anyone please send me the full lyric of this beautiful poem by
> Nirala? Thanks,
>
> kr...@iname.com
You can find it here
http://www.anubhuti-hindi.org/gauravgram/nirala/varde.htm
> maybe, but I don't know where...if you want it I can make it
> and send it to u. Just mail me at my email address.
Well. You can as well send that to this entire newsgroup.
TIA.
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Rawat
प्रिय स्वतंत्र- रव अमृत-मंत्र नव
भारत में भर दे!
Meaning: हे माँ सरस्वती! हमें वरदान दीजिये। हे माँ! हम सबमें नव ज्ञान रूपी अमृत-मंत्र भर दीजिये।
काट अंध्-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
जगमग जग कर दे!
Meaning: हे माँ सरस्वती! हमारे हृदय में स्थित अंधकार की
जगह प्रकाश भरकर इसे जगमग कर दीजिये।
हे माँ सरस्वती! देश में प्रकाश की ऐसी धारा बहा दीजिये,
जो सारी बुराइयों, पापों का नाश करने वाली हो।
नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्र रव
नव नभ के नव विहग-वृंद को
नव पर, नव स्वर दे!
Meaning: हे माँ सरस्वती! देश की जड़ता भंग कर और देश में नयी गति,
नया लय, नया ताल, नया स्वर दीजिये।
पृथ्वी को नयी गति दीजिये,
आकाश में विचरण करने वाले पक्षियों को नया स्वर दीजिये।
वर दे, वीणावादिनी वर दे।
Meaning: हे माँ सरस्वती! हमें वरदान दीजिये।
यह सरस्वती वंदना महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला द्वारा रचित है.