साथियों ,
आज जब शहीद सैनिकों के त्रासदी के आड़ लिए गुंडे "देश- देश" चीखते हुए आतंक मचा रहे हैं , जब कोर्ट में फिल्मी गीतों का वजन संविधान से ज़्यादा हो गया है, तो देश के उन सैनिकों को भी याद करें जिन्हे हम देश भक्त ही रोज़ मार रहें हैं।
एक ऐसे सैनिक और उसके दुश्मनों के बारे में attach किया गया साथी सुनील कुमार के लेख में पढ़े :
विनय वाल्मिकी : सीमा का बेटा , रचना का पति; उम्र २२ साल
दिवाली के दिन देश के राजधानी में शहीद
दुश्मन सेना के जनरल :१. जातिवाद - जो दलितों का कचड़े के ढेर और सीवरों में कैद रखता है. २. कॉर्पोरेट पूँजीवाद - जिसका VA TECH WABAG LTD ने दिल्ली जल बोर्ड पर कब्ज़ा जमाया है और जो अपने अरबों के मुनाफा को चंद रूपए से भी नहीं घटा सकता, ताकि विनय जैसे नौजवान ज़िंदा और स्वस्थ रह सकें।
दुश्मन देश के बादशाह : सभी राजनैतिक ताकतें जिनके सामंतवादी और पूंजीवादी खूनी खेल से हमें चाहिए आज़ादी !
विनय जैसे कई कई सैनिक रोज़ "स्वछ भारत " में शहीद होते हैं।
इनके जैसे हज़ारों दुसरे सैनिक खेतों में, खदानों में, फैक्ट्रियों में शहीद होते है !
"ए मेरे वतन लोगों , ज़रा आँख में भर लो पानी...." (और सीने में थोड़ा गुस्सा भी !)
माधुरी