किसीने सच ही कहा है, "आझाद भारत की लढाई मे आदिवासीयो का अहम हिस्सा रहा है ! अंग्रेजो के खिलाफ इन्होने काफी समय पहले से आवाज उठाई है , पर अफसोस के इनका इतिहास कभी दुनिया के सामने नही आ पाया ! " हाँ, दोस्तो ऐसे ही महान क्रांतिकारीयो मे से एक आदिवासी गौंडवाना समाज के विर बाबुराव पुलेश्वर शेडमाके , जिन्होने अंग्रेजो का जिना हराम करके रख दिया था ! इन्होने अपनी संघटना स्थापीत कर लोगो को एक किया और ब्रिटिश काफिलो पे हमले सुरु कर दिये ! आज भी गौंडवाना का इतिहास गवाह है, चंद्रपुर शहर के घोसरी गाव के पास हुये युद्ध मे बडी मात्रा मे अंग्रेज मारे गये थे और विर बाबुराव शेडमाकेजी का विजय हुआ था ! पर छल कपट से विर बाबुराव शेडमाकेजी को पकडके अंग्रेजो ने 21 अक्टुबर 1858 को चंद्रपुर (महाराष्ट्र)मे गौंड राजा की राजधानी मे फासी पे लटकाया और एक महान क्रांतिकारी का अंत हो गया !
विर बाबुराव शेडमाकेजी के याद मे आज भी चंद्रपुर के जिला कारागुह मे हजारो आदिवासी बंधु मिलके हर साल 21 अक्टुबर को उनका बलिदान दिवस मनाते है ! मेरे सभी फेसबुक दोस्तो से अनुरोध है के इस पोस्ट को शेयर करे और अपना किमती वक्त निकालके इस बलिदान दिवस मे सामिल हो ! चलो , गौंडवाना का इतिहास दुनिया के सामने लाये !
जय सेवा , जय गौंडवाना , जय एकलव्य, जय आदिवासी !
अविनाश धुर्वै