कल दंतेवाड़ा ज़िले में अनेकों आदिवासी सरपंचों ने एक रैली करने की सूचना कलेक्टर को दी .
पुलिस के एसपी साहब ने उन सभी आदिवासी सरपंचों को पुलिस भेज कर घर से उठवा लिया .
एसपी साहब ने आदिवासी सरपंचों को रैली करने की कोशिश करने के लिए धमकाया .
इन आदिवासी सरपंचों की पिटाई भी करी गयी .
ये तो हद हो गयी .
एक तरफ तो सरकार दावा कर रही है कि वह नक्सलियों को इसलिए मार रही है और जेल में डाल रही है क्योंकि नक्सली लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते और हिंसा करते हैं .
तो एस पी साहब आप क्या कर रहे हैं जनाब ?
लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करने वाले आदिवासी सरपंचों को पीटना लोकतंत्र के खिलाफ़ और हिंसा फैलाने का काम नहीं है क्या ?
तो नक्सलियों की तरह लोकतंत्र में विश्वास ना करने के आरोप में इन एसपी साहब को भी जेल में नहीं डाला जाना चाहिये क्या ?
इन्होने कौन से कानून के तहत लोकतान्त्रिक ढंग से चुने गए आदिवासी जनप्रतिनिधियों की पिटाई करी ?
अब देश को समझ में आना ही चाहिये कि आदिवासी इलाकों में अशांति कैसे भडकती है ?
लोकतंत्र के हत्यारे कौन हैं ? - Himanshu Kumar