आदिवासी एकता परिषद और राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद दोनों अलग है
दोस्तों एक बात का स्पष्टीकरण करना चाहता हूं , की आदिवासी एकता परिषद् और राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद् दोनों अलग है । आदिवासी एकता परिषद् कोई परिषद् नहीं आदिवासी का सोसियल स्टडी का सेंटर है जो आदिवासी की कला, संस्कृती, परंपरा और जीवन शैली को उजागर करता है एवं विश्व शांती की विचारधारा है ! जिसका धोषवाक्य है- प्रकृती ही जीवन है,होड(Compitition) में विनाश है । प्रकृती बचाव- मानव बचाव। फपरंतु राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद् बामसेफ द्वारा प्रेरीत एक संगठन है । इस बात का स्पष्टीकरण इस लिए जरुरी समजा क्यों की आदिवासी जन आन्दोलन के कुछ विचार पेश करना चाहता हु.....
आप की जय
आदिवासी जन आंदोलन संघर्ष समिती के विचार से समजे है । हर एक व्यक्ती अपने विचारों का अभियास करता है और अपने विचार रखता है । बहुजन समजाते है की ब्राह्मण आदिवासी पर अत्याचार करते है । हमे ऐसा नहीं मानना है की भूतकाल में ब्राह्मणों ने आदिवासी पर अत्याचार नहीं किया । ब्राह्मण ने अन्याय किया है वोह बहुजन के साथ है । हमे किसी पक्ष या संगठन का विरोध नहीं । परंतु राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद्, भारत मुक्ती मोर्चा, बामसेफ आदिवासी में ऐसा विचार प्रचार प्रसार करते है की भारत देश के मूलनिवासी ओ.बी.सी., दलीत, अल्पसंख्यक और आदिवासी है । परंतु सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2011 को कहा है की इस देश का मूलनिवासी सिर्फ और सिर्फ 8% आदिवासी है । हजारो वर्ष पूर्व आदिवासियो पर धार्मिक आक्रमण हुआ है । वही काम आज राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद्, भारत मुक्ती मोर्चा, बामसेफ ने सच्चे आदिवासी महापुरुषों की नाव को डुबोने को शुरू किया है । ब्राह्मण और बहुजन समाज एक सिक्के की दो बाजु है । आदिवासी को समाज लेना चाहिये की हमारा असली शत्रु कौन है ।
आप की जय
आदिवासी एकता परिषद