मोदी जी ने भारतीय जनता के समक्ष जो उम्मीदों का पहाड़ खड़ा कर दिया है यदि वो उसमें खरे नहीं उतरते है तो इसी पहाड़ के नीचे दबकर उनके "मन की बात" हमेशा के लिये मौन हो जायेगी...
और साथ ही साथ दिल्ली सरकार के प्रति उनका रवैया तो "कोढ में खाज" का कार्य कर रहा है...
जिस देश की ८० प्रतिशत से ज़्यादा जनता मूलभूत आवश्यकताओं (भोजन, आश्रय, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं दैनिक आय) के लिये जद्दोजहद कर रही है उसके लिये "डिजिटल इंडिया" की घोषणा एक मज़ाक़ ही तो है...
Let's hope for the best for our Country...
Sandeep