वीर, तुम अड़े रहो, रज़ाई में पड़े रहो

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Manish Modi

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Jan 2, 2026, 4:16:40 AM (6 days ago) Jan 2
to ROZ EK SHER
वीर, तुम अड़े रहो, रज़ाई में पड़े रहो 
रज़ाईधारी सिंह ‘दिनभर’  

वीर, तुम अड़े रहो,
रज़ाई में पड़े रहो।

चाय का मज़ा रहे,
पकौड़ी से सजा रहे।

मुँह कभी रुके नहीं,
रज़ाई कभी उठे नहीं।

वीर, तुम अड़े रहो,
रज़ाई में पड़े रहो।

माँ की लताड़ हो,
बाप की दहाड़ हो।

तुम निडर डटे रहो,
रज़ाई से उठो नहीं।

वीर, तुम अड़े रहो,
रज़ाई में पड़े रहो॥

मुँह गरजते रहें,
डण्डे भी बरसते रहें।

दीदी भी भड़क उठे,
चप्पल भी खड़क उठे।

वीर, तुम अड़े रहो,
रज़ाई में पड़े रहो।

प्रातः हो कि रात हो,
संग कोई न साथ हो।

रज़ाई में घुसे रहो,
तुम वहीं डटे रहो।

वीर, तुम अड़े रहो,
रज़ाई में पड़े रहो।

एक रज़ाई लिये हुए,
एक प्रण किये हुए।

अपने आराम के लिये,
सिर्फ़ आराम के लिये

वीर, तुम अड़े रहो,
रज़ाई में पड़े रहो।

कमरा ठण्ड में धरे,
कान गालियों से भरे।

यत्न कर निकाल लो,
यह समय निकाल लो।

ठण्ड है, यह ठण्ड है,
यह बड़ी प्रचण्ड है।

हवा भी चल रही,
धूप को डरा रही।

वीर, तुम अड़े रहो,
रज़ाई में पड़े रहो॥


🙏🏻🇮🇳

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