
राष्ट्रीय नदी घाटी मंच
(जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय)
नदी बचाओ, पर्यावरण बचाओ संघर्ष सप्ताह
1 से 7 जून, 2023
नदियों, पर्यावरण और आजीविका की रक्षा के लिए,
अखिल-भारतीय अभियान में शामिल हो !
साथियों,
जिंदाबाद। जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एन.ए.पी.एम) ने मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में 1-2 अप्रैल, 2023 को एक राष्ट्रीय जल-जंगल-जमीन और 'विकास' सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें विभिन्न नदी घाटी क्षेत्रों - आंदोलनों से संघर्षशील साथियों ने भाग लिया और सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के संदर्भ में, 1 से 7 जून, नदी बचाओ, पर्यावरण बचाओ संघर्ष सप्ताह के रूप में मनाया जाएगा।
हम सभी जानते हैं कि वैश्विक स्तर पर 'विकास' की गलत अवधारणा और पूंजीवाद के चलते, हम जल-वायु संकट के बढ़ते खतरों का सामना कर रहे हैं। हमारे देश में भी, त्रुटिपूर्ण 'विकास मॉडल' के परिणामस्वरूप, विनाशकारी नीतियों और महाकाय परियोजनाओं ने लंबे स से नदी घाटियों व पर्यावरण को रौंदते हुए, लोगों को उनकी भूमि, आवास और संस्कृतियों से विस्थापित किया है, जो आज भी चल रहा है। सबसे बुरा प्रभाव आदिवासियों व मूलवासियों, दलितों, छोटे और सीमांत किसानों, भूमिहीन लोगों और मछुआरों, और उनमें भी महिलाओं और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों पर पड़ता है।
खेतिहर, वन-आश्रित और और मछुआरा समुदायों के अधिकारों का हनन कर, सरकारें बार-बार अपने पर्यावरण विरोधी, जन-विरोधी स्वभाव को उजागर कर रही हैं। नदियों, जमीनों, जंगलों, तटीय क्षेत्रों और खानों सहित हमारे देश के कीमती संसाधनों को सरकारें अपने कॉर्पोरेट मित्रों को कौड़ियों के भाव पर बेच रहे हैं और उनके पक्ष में सभी कानूनों और नीतियों को बदल रहे हैं। आम लोग इन फैसलों के खिलाफ़ कई जगहों पर प्रतिरोध में खड़े हो रहे हैं और महत्वपूर्ण अस्तित्व-संबंधी मुद्दों को उठा भी रहे हैं, मगर सरकार एक तरफ़ राजकीय दमन और दूसरी तरफ़ धार्मिक आधार पर समुदायों का ध्रुवीकरण से, उन्माद को बढ़ावा देती हैं।
अगर हम अभी भी सचेत होकर, सक्रिय नहीं हुए तो तापमान में बढ़ोतरी, बाढ़, सुखाड़ और समुद्र के जल-स्तर बढ़ने जैसे अनेक घटनाएं मानव सभ्यता पर गंभीर संकट के रूप में सामने आएगी। जोशीमठ में दरकते हिमालय की आवाज़ को यदि अनसुना कर देंगे, तो भयावह दौर हमारे सामने खड़ा होगा। इसलिए, सरकारों, कॉर्पोरेटों और दबंग वर्गों को जवाबदेह ठहराते हुए, जल-वायु न्याय और सामाजिक न्याय के लिए हम सबको सामूहिक पहल मज़बूत करना होगा।
पर्यावरण, प्रकृति-आधारित व श्रमिक समुदायों के जल, जंगल, जमीन, जीवन और आजीविका की रक्षा के लिए हमारे संघर्षों को जारी रखते हुए, राज्य दमन और सामाजिक असमानताओं को चुनौती देते हुए, आइए हम फिर से एकजुट होते हैं।
नदी बचाओ - पर्यावरण बचाओ संघर्ष सप्ताह के तहत, हम सब सामूहिक रूप से:
Ø अपने स्थानीय मुद्दों / संघर्षों के साथ-साथ, देश के विभिन्न इलाकों में चल रहे आंदोलन जैसे: नर्मदा, जोशीमठ, बसनिया, गंगा, यमुना, सतलज, कोंकण, कोसी, प्लाचीमड़ा, फरक्का, तीस्ता, हसदेव, सुबानसिरी, किन्नौर, महानदी, साबरमती, महादेई, दिबांग, पोलवरम, कृष्णा, पेरियार, कावेरी, मुला-मुथा, तवी, मूसी आदि तथा हिमालय, पश्चिमी घाटी, पूर्वी घाटी, अरावली आदि की रक्षा के लिए चल रहे आंदोलन के साथ भी एकजुटता व्यक्त करे और सभी प्रकृति-आधारित समुदायों की मांगों और नागरिक, युवा पहल को मज़बूत करे।
Ø अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचें और जीवित इकाइयों के रूप में नदियों के अधिकार, पानी का समतामूलक बटवारा, विनाशकारी रेत खनन, विस्थापन, प्रदूषण, कॉरपोरेट्स के पक्ष में जल व्यपवर्तन, अंधा-धुंध शहरीकरण, पर्यटन व रिवर फ्रन्ट, पानी का निजीकरण, गहराते जलवायु संकट जैसे दीर्घकालिक मुद्दों पर विभिन्न ज़मीनी एवं ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित करे।
Ø पर्यावरण, वन, कृषि, भूमि, तटीय, जैव-विविधता और मत्स्य कानूनों, नीतियों में प्रतिगामी, जन व पर्यावरण के लिए हानिकारक संशोधनों का पुरजोर विरोध करे। साम्प्रदायिक और नफ़रत-भरी राजनीति को नकारकर, प्रगति' की मिथ्या का पर्दाफ़ाश करें और सही, सतत, न्यायसंगत विकास के प्रयासों और विकल्पों को मज़बूत करें।
विनाशकारी 'विकास', कॉर्पोरेट लूट और दमन के खिलाफ, नदियों, जल स्रोतों, प्राकृतिक संसाधनों और अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत समुदायों की आवाज बुलंद करते हुए, जो कार्यक्रम आपके आंदोलन / समूह / संगठन द्वारा प्रस्तावित है, उसका विवरण कृपया इस फॉर्म में भरें। https://forms.gle/4bsJUydBUgLF6gC99
सोशल मीडिया पर @napmindia को अपने ज़मीनी और ऑनलाइन कार्यक्रमों के अपडेट, तस्वीरें और वीडियो के साथ टैग करें और उन्हें nadigha...@napmindia.org पर भी ई-मेल करें। इस संघर्ष सप्ताह अभियान में आपकी सक्रिय भागीदारी और जुड़ाव की प्रतीक्षा में ..
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