यूनिटी और ग्नोम ३ का बुरा अनुभव, सिनामॉन ने दी राहत

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ePandit | ई-पण्डित

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Feb 7, 2012, 8:28:46 AM2/7/12
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मित्रों, जहाँ उबुंटू ने यूनिटी का दामन थाम लिया है (और छोड़ने को तैयार नहीं) वहीं अधिकतर वितरण ग्नोम ३ को अपना रहे हैं। इन दोनों में ही प्रयोक्ता संतुष्ट नहीं। इस बारे में मैं अपने अनुभव बताने जा रहा हूँ।

उबुंटू के यूनिटी में किसी ऍप्लिकेशन तक पहुँचने के लिये पहले ़डैश बटन पर जाओ फिर ऍप्लिकेशन का नाम लिखो, उसके आने का इन्तजार करो, फिर क्लिक कर चलाओ। बड़ा लम्बा चक्कर है। फिर किसी रनिंग ऍप्लिकेशन पर स्विच करना हो तो पहले माउस लैफ्ट में लाकर लॉञ्चर के आने का इन्तजार करो फिर क्लिक करके स्विच करो।

कुल मिलाकर कोई ऍप्लिकेशन चलाना और चलती ऍप्लिकेशनों के मध्य स्विच करना (जो कि दो सबसे आम काम हैं), दोनों ही कामों में यूनिटी संतुष्ट नहीं करता। ऊपर से हम लॉञ्चर को अपनी इच्छा से विण्डोज़ टास्कबार की तरह नीचे भी नहीं लगा सकते। कम से कम डैश बटन को टॉप की बजाय बॉटम पर लगाया होता (या विकल्प दिया होता) तो भी कुछ सुविधा होती।

ग्नोम ३ की बात करें तो कोई भी ऍप्लिकेशन चलाने के लिये पहले ऊपर ऍक्टिविटीज पर क्लिक करो, फिर ऍप्लिकेशन टैब पर क्लिक कर ऍप्लिकेशन चलाओ। इसका बायाँ पैनल (फेवरिट बार या जो भी कहो) भी ऑटोहाइड टाइप रहता है जबकि यह हर समय उपलब्ध रहना चाहिये था। ऍप्लिकेशनों के मध्य स्विच करना इसमें भी सरल नहीं।

कुल मिलाकर यूनिटी और ग्नोम ३ दोनों ने ही इंटरफेस के आधुनिकीकरण के नाम पर प्रयोक्ता का काम मुश्किल कर दिया है। इन दोनों में ही कार्य करने की गति धीमी हो जाती है। ग्नोम क्लासिक (ग्नोम २) में काम करना कितना सरल था, उसके Applications मैन्यू से कोई भी ऍप्लिकेशन चलाना और टास्कबार से चलती ऍप्लिकेशनों के बीच स्विच करना कितना सरल था। दरअसल यूनिटी और ग्नोम ३ दोनों ही माउस, कीबोर्ड की बजाय टचस्क्रीन इंटरफेस के ज्यादा उपयुक्त लगते हैं।

ग्नोम क्लासिक में जहाँ काम आसानी से होता था, वहीं विण्डोज़ से आये लोग भी आसानी से कार्य कर पाते थे जबकि यूनिटी और ग्नोम ३ दोनों में ही नये सिरे से झक मारना पड़ता है। डैवलपर यह सोच कर खुश हैं कि हम नया इंटरफेस बना रहे हैं। वे इन दोनों की आलोचना का कारण प्रयोक्ताओं का पुराने इंटरफेस के प्रति जड़त्व (inertia) समझ रहे हैं जबकि सच्चायी यह है कि ये दोनों ही इंटरफेस डैस्कटॉप के अनकूल नहीं।

अभी हाल में ही मैंने लिनक्स मिंट वालों द्वारा विकसित सिनामॉन (cinnamon) डैस्कटॉप आजमाया जो कि ग्नोम ३ का ही एक फॉर्क है परन्तु ग्नोम क्लासिक जैसे रूप वाला है। यह काफी सही है, मुझे इसे देखकर काफी राहत का अनुभव हुआ। इसमें काम करना सरल है, ऍप्लिकेशनें लॉञ्च करना एवं उनके मध्य स्विच करना सरल है। पैनल की डिफॉल्ट लोकेशन भी विण्डोज़ टास्कबार की तरह ऊपर की बजाय नीचे रखी गयी है। मुझे लगता है कि मिंट वाले प्रयोकताओं की सुन रहे हैं जबकि उबुंटू वाले नहीं। मुझे लगता है मैं आगे से सिनामॉन ही प्रयोग करने वाला हूँ।

आपके क्या अनुभव हैं, कृपया साझे करें।
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Shrish Benjwal Sharma (श्रीश बेंजवाल शर्मा)
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Ravishankar Shrivastava

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Feb 7, 2012, 10:54:40 AM2/7/12
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केडीई आजमाया क्या?

2012/2/7 ePandit | ई-पण्डित <sharma...@gmail.com>

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सधन्यवाद,
रवि
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Narendra Sisodiya

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Feb 7, 2012, 11:50:25 AM2/7/12
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2012/2/7 ePandit | ई-पण्डित <sharma...@gmail.com>
ग्नोम क्लासिक में जहाँ काम आसानी से होता था, वहीं विण्डोज़ से आये लोग भी आसानी से कार्य कर पाते थे जबकि यूनिटी और ग्नोम ३ दोनों में ही नये सिरे से झक मारना पड़ता है। डैवलपर यह सोच कर खुश हैं कि हम नया इंटरफेस बना रहे हैं। वे इन दोनों की आलोचना का कारण प्रयोक्ताओं का पुराने इंटरफेस के प्रति जड़त्व (inertia) समझ रहे हैं जबकि सच्चायी यह है कि ये दोनों ही इंटरफेस डैस्कटॉप के अनकूल नहीं।


 बहुत सही कहा ! 
इसी कारण में Ubuntu का बहुत बड़ा आलोचक रहा हूँ 
ये वेसे ही है जैसे सरकार की नीतिया चलती है जिसको नामिनी स्तर की कोई जानकारी नहीं होती है 

Narendra Sisodiya

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Feb 7, 2012, 11:50:50 AM2/7/12
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2012/2/7 Narendra Sisodiya <nare...@narendrasisodiya.com>

 जमीनी स्तर 


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ePandit | ई-पण्डित

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Feb 7, 2012, 6:19:53 PM2/7/12
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7 फरवरी 2012 9:24 अपराह्न को, Ravishankar Shrivastava <ravir...@gmail.com> ने लिखा:

केडीई आजमाया क्या?

 नहीं जी, हमेशा यही सुना पढ़ा था कि ग्नोम केडीई से सरल और कम पावर हंगरी है। अब शायद केडीई आजमाना पड़ेगा।

आप कौन सा प्रयोग करते हैं, केडीई? क्या शुरु से या फिर यूनिटी/ग्नोम ३ के आने पर स्विच किया?
 

ePandit | ई-पण्डित

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Feb 7, 2012, 6:35:45 PM2/7/12
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उबुंटू को लोगों के मन से लिनक्स का भय निकालने का श्रेय जाता है। उबुंटू के सॉफ्टवेयर सैंटर द्वारा सरल इंस्टालेशन के कारण मैं इसे प्रयोग करता था।

साथ ही ग्नोम २ के ऍप्लिकेशन मैन्यू में ऍप्लिकेशनें श्रेणीवार रखा होने से उनकी लोकेशन दिमाग में याद हो जाती थी और एकदम से किसी पर भी पहुँचा जा सकता था। इसकी तुलना में विण्डोज़ का स्टार्ट मैन्यू या सिनामॉन का विण्डोज़ ७ जैसा मैन्यू भी उतना कारगर नहीं।

यूनिटी और ग्नोम ३ से शिकायत केवल नये इंटरफेस के कारण नहीं है, लुक के हिसाब से तो दोनों ही सुन्दर और आधुनिक लगते हैं लेकिन शिकायत यूजेब्लिटी को लेकर है। दोनों में ही किसी ऍप्लिकेशन को लॉञ्च करने में बहुत समय लगता है और चलती ऍप्लिकेशनों के मध्य स्विच करना कठिन है।

यदि यूनिटी में कस्टमाइजेशन की सुविधा होती, लॉञ्चर को मॅक ओऍस के डॉक की तरह नीचे लगाया जा सकता तथा डैश बटन उस पर नीचे लैफ्टमोस्ट कॉ़र्नर (या स्क्रीन के सैंटर) में होता तो बेहतर था। अभी क्या है कि डैश बटन तक पहुँचने के लिये ऊपर की यात्रा करनी पड़ती है। भले ही इसे कथित सुपरकी से लॉञ्च किया जा सकता हो पर केवल माउस का काम करते समय उसे छोड़कर कीबोर्ड पर जाना फिर झंझट है। साथ ही कीबोर्ड के अभ्यस्तों (जिनमें मैं भी शामिल हूँ) के लिये एक परमानेंट सर्चबार स्क्रीन के सैंटर में रहता (या लगाया जा सकता) तो कुछ बात बनती।

दूसरी ओर ग्नोम ३ में कुछ भी काम करने के लिये हर बार पहले Activities क्लिक करना पड़ता है। कम से कम उसका पैनल तो स्थायी होता, यूनिटी में लॉञ्चर वाली ऍप्लिकेशनें तो कुछ आसानी से चला सकते हैं, ग्नोम ३ में वह भी नहीं।

7 फरवरी 2012 10:20 अपराह्न को, Narendra Sisodiya <nare...@narendrasisodiya.com> ने लिखा:

बहुत सही कहा ! 
इसी कारण में Ubuntu का बहुत बड़ा आलोचक रहा हूँ 
ये वेसे ही है जैसे सरकार की नीतिया चलती है जिसको नामिनी स्तर की कोई जानकारी नहीं होती है

Swapnil Bhartiya

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Feb 7, 2012, 8:33:12 PM2/7/12
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मेरी राय मे लिनकस मिन्ट ट्राई करें अभी अभी एक लेख प्रकाशित किया है, इससे मद्द मिलेगी

http://www.muktware.com/articles/3289/linux-mint-kde-12-review-your-perfect-desktop

Swapnil
मेरी राय मे लिनकस मिन्ट ट्राई करें अभी अभी एक लेख प्रकाशित किया है, इससे मद्द मिलेगी

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Shrish Benjwal Sharma (श्रीश बेंजवाल शर्मा)
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Ravishankar Shrivastava

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Feb 7, 2012, 9:41:04 PM2/7/12
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केडीई तो शुरू से मेरा पसंदीदा रहा है.
और, पावर हंग्री नहीं चाहिये तो एक्सएफसीई का जवाब नहीं!
सादर,
रवि

2012/2/8 ePandit | ई-पण्डित <sharma...@gmail.com>
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