मित्रों, जहाँ उबुंटू ने यूनिटी का दामन थाम लिया है (और छोड़ने को तैयार नहीं) वहीं अधिकतर वितरण ग्नोम ३ को अपना रहे हैं। इन दोनों में ही प्रयोक्ता संतुष्ट नहीं। इस बारे में मैं अपने अनुभव बताने जा रहा हूँ।
उबुंटू के यूनिटी में किसी ऍप्लिकेशन तक पहुँचने के लिये पहले ़डैश बटन पर जाओ फिर ऍप्लिकेशन का नाम लिखो, उसके आने का इन्तजार करो, फिर क्लिक कर चलाओ। बड़ा लम्बा चक्कर है। फिर किसी रनिंग ऍप्लिकेशन पर स्विच करना हो तो पहले माउस लैफ्ट में लाकर लॉञ्चर के आने का इन्तजार करो फिर क्लिक करके स्विच करो।
कुल मिलाकर कोई ऍप्लिकेशन चलाना और चलती ऍप्लिकेशनों के मध्य स्विच करना (जो कि दो सबसे आम काम हैं), दोनों ही कामों में यूनिटी संतुष्ट नहीं करता। ऊपर से हम लॉञ्चर को अपनी इच्छा से विण्डोज़ टास्कबार की तरह नीचे भी नहीं लगा सकते। कम से कम डैश बटन को टॉप की बजाय बॉटम पर लगाया होता (या विकल्प दिया होता) तो भी कुछ सुविधा होती।
ग्नोम ३ की बात करें तो कोई भी ऍप्लिकेशन चलाने के लिये पहले ऊपर ऍक्टिविटीज पर क्लिक करो, फिर ऍप्लिकेशन टैब पर क्लिक कर ऍप्लिकेशन चलाओ। इसका बायाँ पैनल (फेवरिट बार या जो भी कहो) भी ऑटोहाइड टाइप रहता है जबकि यह हर समय उपलब्ध रहना चाहिये था। ऍप्लिकेशनों के मध्य स्विच करना इसमें भी सरल नहीं।
कुल मिलाकर यूनिटी और ग्नोम ३ दोनों ने ही इंटरफेस के आधुनिकीकरण के नाम पर प्रयोक्ता का काम मुश्किल कर दिया है। इन दोनों में ही कार्य करने की गति धीमी हो जाती है। ग्नोम क्लासिक (ग्नोम २) में काम करना कितना सरल था, उसके Applications मैन्यू से कोई भी ऍप्लिकेशन चलाना और टास्कबार से चलती ऍप्लिकेशनों के बीच स्विच करना कितना सरल था। दरअसल यूनिटी और ग्नोम ३ दोनों ही माउस, कीबोर्ड की बजाय टचस्क्रीन इंटरफेस के ज्यादा उपयुक्त लगते हैं।
ग्नोम क्लासिक में जहाँ काम आसानी से होता था, वहीं विण्डोज़ से आये लोग भी आसानी से कार्य कर पाते थे जबकि यूनिटी और ग्नोम ३ दोनों में ही नये सिरे से झक मारना पड़ता है। डैवलपर यह सोच कर खुश हैं कि हम नया इंटरफेस बना रहे हैं। वे इन दोनों की आलोचना का कारण प्रयोक्ताओं का पुराने इंटरफेस के प्रति जड़त्व (inertia) समझ रहे हैं जबकि सच्चायी यह है कि ये दोनों ही इंटरफेस डैस्कटॉप के अनकूल नहीं।
अभी हाल में ही मैंने लिनक्स मिंट वालों द्वारा विकसित सिनामॉन (cinnamon) डैस्कटॉप आजमाया जो कि ग्नोम ३ का ही एक फॉर्क है परन्तु ग्नोम क्लासिक जैसे रूप वाला है। यह काफी सही है, मुझे इसे देखकर काफी राहत का अनुभव हुआ। इसमें काम करना सरल है, ऍप्लिकेशनें लॉञ्च करना एवं उनके मध्य स्विच करना सरल है। पैनल की डिफॉल्ट लोकेशन भी विण्डोज़ टास्कबार की तरह ऊपर की बजाय नीचे रखी गयी है। मुझे लगता है कि मिंट वाले प्रयोकताओं की सुन रहे हैं जबकि उबुंटू वाले नहीं। मुझे लगता है मैं आगे से सिनामॉन ही प्रयोग करने वाला हूँ।
आपके क्या अनुभव हैं, कृपया साझे करें।
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Shrish Benjwal Sharma (श्रीश बेंजवाल शर्मा)
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