लिनक्स के प्रति बड़ी उत्सुकता थी पर लिनक्स का कोई ऐसा जानकर नहीं मिला
जो इसके बारे में जानकारी दे सके आखिर खुद ही लिनक्स से दो दो हाथ करने
की ठानी और नेहरु प्लेस से फेडोरा की एक डीवीडी ले आये| अपने पीसी में
संस्थापित कर लिया पर समुचित जानकारी न होने के चलते म्यूजिक व वीडियो
नहीं चला पाए,एक दिन नेट पर भ्रमण करते अंकुर गुप्ता का ब्लॉग मिला जिस
पर लिनक्स के बारे में काफी लिखा था,हमारे द्वारा अपनी प्रॉब्लम बताने पर
अंकुर गुप्ता ने हमें लिनक्स का उबुन्टू वितरण अपनाने की सलाह दी हमने
उबुन्टू का नाम पहली बार सुना था उबुन्टू की साईट पर गए और उनसे एक फ्री
सीडी भेजने का अनुरोध किया, सप्ताह के भीतर ही हमें कुरियर से एक सीडी
मिल गयी|
अपने पीसी में सस्थापित किया बडी आसानी उबुन्टू हमारे पीसी में
संस्थापित हो गया जब म्यूजिक,वीडियो चलाया तो उसे चलाने हेतु कोडेक भी
उबुन्टू महाराज ने नेट से स्वत: तलाश कर संस्थापित कर लिए| तब आज तक हम
उबुन्टू का इस्तेमाल कर रहे है, न वायरस आने का डर,न हेंग होने का डर, न
विंडो की तरह करप्ट होकर खराब होने का डर और न मन में ये आता कि हम
पायरेटेड विंडो का इस्तेमाल कर रहे है क्योंकि लिनक्स तो फ्री है|
लिनक्स को सीखते सीखते जो सीखा वह हमने ज्ञान दर्पण .कॉम पर भी लिख दिया
ताकि हिंदी भाषी लोगों को लिनक्स के बारे में हिंदी भाषा में सहायता मिल
जाये| जो आप इस लिंक पर जाकर पढ़ सकते है
http://www.gyandarpan.com/search/label/linuxकैसा रहा आपका लिनक्स के साथ अनुभव जरुर बताएं|