६१०६. कौन सी जगह है ये, कौन सा पड़ाव है – १९ जुलाई २०१७
कौन सी जगह है ये, कौन सा पड़ाव है
इस जगह से लग रहा किसलिए लगाव है
हो न हो वही है ये जो न याद है रहा
इक जवान उम्र का कोई ये घुमाव है
था मिलन यहाँ हुआ, या बिछुड़ गए यहाँ
धुंध में छिपा है सब, उम्र का ढलाव है
पा सके उसे न हम, भूल भी नहीं सके
अज तक गया नहीं दिल से वो तनाव है
बीत हैं जो दिन गए लौट के न आएंगे
क्या अजीब ये ख़लिश वक़्त का बहाव है.
बहर --- २१२१ – २१२ // २१२१ – २१२
महेश चन्द्र गुप्त ’ख़लिश’
२८ जून २०१७