६१४१. औक़ात तेरी क्या है उस आक़ा के सामने – ६ अगस्त २०१७

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Dr.M.C. Gupta

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Aug 5, 2017, 10:29:31 AM8/5/17
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६१४१. औक़ात तेरी क्या है उस आक़ा के सामने ६ अगस्त २०१७  


 

औक़ात तेरी क्या है उस आक़ा के सामने

वाजिब इबादत है तुझे मौला के सामने

 

करना अदब सीखो उन्होंने जन्म है दिया

नज़रें झुकाओ तुम पिता-माता के सामने

 

मालूम है मुमकिन नहीं उसको मैं पा सकूँ

लाचार लेकिन दिल है तमन्ना के सामने

 

कानून की गिरिफ़्त से तो बच गया है वो

लगनी अदालत है अभी जनता के सामने

 

अख़लाक़ को तोड़ा है उसने काम यूँ किया

क्या मुँह दिखाएगा वो अब दुनिया के सामने

 

उसके बिना तो है नहीं पत्ता भी हिल सके

हस्ती तेरी क्या है ख़लिश कर्ता के सामने.

 

औक़ात = प्रतिष्ठा, इज़्ज़त, मान -मर्यादा 

आक़ा = स्वामी, प्रभु, मालिक

अख़लाक़ = अच्छा आचरण, शिष्टाचार

 

बहर --- २२१२  २२१२  २२१२  १२

 

महेश चन्द्र गुप्त ’ख़लिश’

२९ जुलाई २०१७


--
(Ex)Prof. M C Gupta
MD (Medicine), MPH, LL.M.,
Advocate & Medico-legal Consultant
www.writing.com/authors/mcgupta44

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