६०१६. भला तकलीफ़ क्यों कुछ भी मेरी ख़ातिर उठाओगे – ३० अगस्त २०१७

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Dr.M.C. Gupta

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Aug 29, 2017, 11:10:25 AM8/29/17
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६०१६. भला तकलीफ़ क्यों कुछ भी मेरी ख़ातिर उठाओगे ३० अगस्त २०१७ 

   

 

भला तकलीफ़ क्यों कुछ भी मेरी ख़ातिर उठाओगे

मुझे कुछ दर्द होगा तो खड़े तुम मुस्कुराओगे 

                   

ज़रूरत का ही नाता था, ज़रूरत अब नहीं तुमको

भला फिर किसलिए अब तुम पलट के दर पे आओगे

 

तकाज़ा था मुहब्बत का मगर वो भी नहीं अब तो

नहीं उम्मीद है तुमसे कोई वादा निभाओगे

 

मुझे मालूम है रिश्ता नहीं तुमसे रहा है कुछ

मेरी मैयत कभी होगी मगर तुम तो न आओगे

 

ख़लिश अफ़सोस क्या कीजे, उलाहना दीजिए क्योंकर

लकीरों में लिखा है जो उसे कैसे मिटाओगे.

 

बहर --- १२२२  १२२२  १२२२  १२२२


महेश चन्द्र गुप्त ’ख़लिश’

१ अप्रेल २०१७


--
(Ex)Prof. M C Gupta
MD (Medicine), MPH, LL.M.,
Advocate & Medico-legal Consultant
www.writing.com/authors/mcgupta44

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