१३२. क्यों आपने हमको बना डाला है दीवाना – १० जुलाई २०१७
क्यों आपने हमको बना डाला है दीवाना
ज्यों राख होना चाहता है ख़ुद ये परवाना
आलम ज़माने का लगे है आज कुछ ऐसे
मौसम है जैसे हो गया कुछ और मस्ताना
सीने की धड़कन पे नहीं कुछ रह गया काबू
है हो गया दिल आज अपने से ही बेगाना
अब क्यों ज़रूरत हो भला सागर-ओ-प्याले की
नज़रों में दिलबर की मिला हमको है मैखाना
ग़म आ गया इस दिल में दिलबर का है जिस दिन से
बाक़ी सभी ग़म से ख़लिश अब दिल है अनजाना.
बहर --- २२१२ २२१२ २२१२ २२
महेश चन्द्र गुप्त ख़लिश
१५ मार्च २००४