५३८६. क्या फ़ायदा जो तक रहे मुड़ के हो बार- बार — २७ अगस्त २०१५
क्या फ़ायदा जो तक रहे मुड़ के हो बार-बार
है तर्क रिश्ता हो चुका अब जा रहा है यार
दिल में बहुत थीं दूरियाँ जब तक रहे थे पास
अब दूर हो कर किसलिए यूँ आ रहा है प्यार
इसका भरोसा क्या करें हरजाई है ये वक़्त
कल तक रहे जो फूल वो ही हो गए हैं ख़ार
गर यार को मिल जाए दूजा यार कोई और
आज़ाद है वो, क्यों रहा है तू उसे पुकार
औरों में तू किस वास्ते ढूँढे ख़लिश है दोष
ऐबों से अपने ही नहीं तू पा सका है पार.
बहर --- २२१२ २२१२ २२१२ १२१
-- महेश चन्द्र गुप्त ’ख़लिश’
१८ अगस्त २०१५
शुक्रिया हम पे है ये निगाह जो पड़ी
यूँ लगा दुख रही रग कोई रो पड़ी.
--ख़लिश
=======================
औरों में तू किस वास्ते ढूँढे ख़लिश है दोषऐबों से अपने ही नहीं तू पा सका है पार.
एकदम सही कहा आपने खलिशजी,सादरराकेश
__._,_.___
Reply via web post • Reply to sender • Reply to group • Start a New Topic • Messages in this topic (2)
.![]()
__,_._,___
राकेश जी,
बहुत धन्यवाद।
उत्तर में विलंब हुआ।
-- ख़लिश
================
औरों में तू किस वास्ते ढूँढे ख़लिश है दोषऐबों से अपने ही नहीं तू पा सका है पार.
एकदम सही कहा आपने खलिशजी,सादरराकेश
On Wednesday, August 26, 2015 1:25 PM, "'Dr.M.C. Gupta' mcgu...@gmail.com [HINDI-BHARAT]" <HINDI-...@yahoogroups.com> wrote:
__._,_.___
Reply via web post • Reply to sender • Reply to group • Start a New Topic • Messages in this topic (2)
.![]()
__,_._,___
medico-legal-qu...@yahoogroups.co.in
https://www.facebook.com/Khalish-Ghazals-335693300452273/?modal=admin_todo_tour