६१३२. कुछ लोग मुझ पर इस तरह अहसान कर गए – ३१ जुलाई २०१७
कुछ लोग मुझ पर इस तरह अहसान कर गए
बिन बात ही आफ़त में मेरी जान कर गए
ता-उम्र इज़्ज़त थी कमाई चल असूल पे
वो एक पल में ही बहुत नुक़सान कर गए
हमको न थी ये फ़िक्र कोई मान दे हमें
पर किसलिए महफ़िल में वो अपमान कर गए
उनकी सुनी सबने, बहुत वो तो हसीन हैं
हमको नज़र में सबकी बेईमान कर गए
माना कि वो पर्दानशीं हैं, क्या मिला उन्हें
जो बज़्म में धूमिल हमारी शान कर गए
हमने तो पाए ख़ार पर बाँटे हैं फूल ही
उनका ख़लिश महफ़िल में हम गुणगान कर गए.
बहर --- २२१२ २२१२ २२१२ १२
महेश चन्द्र गुप्त ’ख़लिश’
२१ जुलाई २०१७