६०९१. कहती है ये ख़ुशियों की सहर, ईद मुबारक – , २५ जून २०१७

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Dr.M.C. Gupta

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Jun 24, 2017, 10:17:28 AM6/24/17
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६०९१. कहती है ये ख़ुशियों की सहर, ईद मुबारक२५ जून २०१७ 


 

कहती है ये ख़ुशियों की सहर, ईद मुबारक

है झूम उठा सारा शहर, ईद मुबारक

 

दो दोस्तियों का सदा पैग़ाम सभी को

मन में न रहे आज ज़हर, ईद मुबारक

 

दिल खोल के बाँटें सिवैयाँ, शौक अजब है

उल्फ़त की उठी दिल में लहर, ईद मुबारक

 

आया है हसीं वक़्त मेरे दोस्त ज़रा सुन

कुछ देर अभी और ठहर, ईद मुबारक

 

रंगीन नज़ारों में ख़लिश रब न भुलाना

कर लो जो इबादत दो पहर, ईद मुबारक.

 

बहर --- २२११  २२११  २२११  २२

 [अथवा-- २२१  १२२१  १२२१  १२२]

बहरे हज़ज मुसमन मकफ़ूफ महज़ूफ

[उदाहरण-- तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा, इन्सान की औलाद है इन्सान बनेगाया फिर बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी]  

 

नोट—इसे पंकज सुबीर जी के ईद पर तरही मुशायरे के लिए लिखा गया. तरही मुशायरे का मिसरा था—“ कहती है ये ख़ुशियों की सहर, ईद मुबारक”

 

महेश चन्द्र गुप्त ’ख़लिश’

१३ जून २०१७


--
(Ex)Prof. M C Gupta
MD (Medicine), MPH, LL.M.,
Advocate & Medico-legal Consultant
www.writing.com/authors/mcgupta44

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