६०६९. अपने रोते दिल को है ख़ुद ही बहलाना सीख लिया – २८ जुलाई २०१७
अपने रोते दिल को है ख़ुद ही बहलाना सीख लिया
तनहाई में रोते-रोते चुप हो जाना सीख लिया
मतलब की इस दुनिया में अपना होता है कोई नहीं
अपने दिल के घावों को ख़ुद ही सहलाना सीख लिया
धोखा भी दे सकता है गो चेहरा हो मासूम कोई
आँखें नम रखना जब हो मौसम मस्ताना, सीख लिया
हमने जाना है दुनिया में कोई अच्छा है न बुरा
जैसे-तैसे भी हमने मन को समझाना सीख लिया
अपनापन दिखलाए कोई, ऐसी आशा ही न रही
अपना है रब, ख़लिश सभी जग है बेगाना सीख लिया.
बहर --- २२-२ २२-२२ २२-२२ २११२
महेश चन्द्र गुप्त ’ख़लिश’
२२ मई २०१७