६१०९. राही ये पूछ बैठा अपने ही कारवाँ से – ४ जुलाई २०१७

2 views
Skip to first unread message

Dr.M.C. Gupta

unread,
Jul 3, 2017, 10:19:34 AM7/3/17
to Hindienglishpoetry, hindibharat, काव्यांजलि

६१०९. राही ये पूछ बैठा अपने ही कारवाँ से जुलाई २०१७

 

 

राही ये पूछ बैठा अपने ही कारवाँ से

आए कहाँ से हैं हम, जाना कहाँ- कहाँ से

 

उसमें बुज़ुर्ग था इक, सुन कर सवाल बोला

तुझको बता है लेना मंज़िल के क्या निशाँ से 

 

चलते रहें यही बस इक फ़र्ज़ है हमारा

रब चाहता है कुछ भी पूछें नहीं ज़ुबाँ से


जाने न है ये इंसां किस ओर से है आया

उसको नहीं पता ये जाना कहाँ यहाँ से

 

क़िस्मत में क्या लिखा है ये तो पता नहीं है

लेकिन ख़बर है सबको जाना है इस जहाँ से

 

है काम नेक करना, बस याद रख ख़लिश ये

भरमाएगा कुरानो-गीता के तू बयाँ से.

 

बहर  --- २२१२-१२२  //  २२१२-१२२ 

 

महेश चन्द्र गुप्त ’ख़लिश’

२ जुलाई २०१७


--
(Ex)Prof. M C Gupta
MD (Medicine), MPH, LL.M.,
Advocate & Medico-legal Consultant
www.writing.com/authors/mcgupta44

Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages