४६. हसीं कोई किसीसे कब ख़फ़ा हो जाए, क्या मालूम – १ जुलाई २०१७
हसीं कोई किसीसे कब ख़फ़ा हो जाए, क्या मालूम
सनम की बात कोई दिल को कब तड़पाए, क्या मालूम
कभी थे मेहरबां हम पे, बहुत वो प्यार करते थे
मगर क्यों आज बैठे हैं वो मुँह लटकाए, क्या मालूम
हसीनों की अदाओं को समझ पाया नहीं कोई
भला किस ख़्याल से ख़ुद को वो हैं भरमाए, क्या मालूम
बताते हैं न लब से कुछ, न सुनते हैं किसीकी वो
अजब गुत्थी है ये कैसे कोई सुलझाए, क्या मालूम
हुए नाराज़ हैं हमसे ख़लिश जो शाद रहते थे
डगर उल्फ़त की मंज़िल कौन सी दिखलाए, क्या मालूम.
बहर --- १२२२ १२२२ १२२२ १२२२
महेश चन्द्र गुप्त ख़लिश
२१ मई २००३