६१५३. हमने सुनाया दर्द अपना तो वो हँस दिए – १५ अगस्त २०१७
हमने सुनाया दर्द अपना तो वो हँस दिए
बोले ज़हर के जाम हमने भी बहुत पिए
बोले कि तुम तो मर्द हो, है पीर क्या पता
औरत ने दुनिया में बहुत ही सब्र हैं किए
हर ज़ुल्म औरत पे किया मर्दों ने है सदा
औरत ने अपने लब हमेशा के लिए सिए
तुमको ज़रा सी चोट जो है लग गई तो क्या
बैठे हैं हम तो लाख सीने में सितम लिए
है दर्द हलका आपका जो दिल दुखा रहा
हम तो यहाँ हर साँस में ले दर्द हैं जिए
आएँ, कि हम बहलाएँ दिल कुछ आपका ज़रा
जो ग़म हमारा है उसे भूले सदा किए
है बेसहारा सी बहुत औरत की ज़िंदगी
कह कर तलाक तीन ख़लिश मर्द ने दिए.
बहर --- २२१२ २२१२ २२१२ १२
महेश चन्द्र गुप्त ’ख़लिश’
७ अगस्त २०१७
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