६१२४. शक्की मिज़ाज वाले कैसे लुभाऊँ तुझको – २५ जुलाई २०१७
शक्की मिज़ाज वाले कैसे लुभाऊँ तुझको
दिल है ग़ुलाम तेरा, कैसे बताऊँ तुझको
तू ने न प्यार जाना, क्या है वफ़ा न जानी
अनजान शै से वाक़िफ़ कैसे कराऊँ तुझको
तूने तो जंग में बस सिर काटना है सीखा
सज़दे में सिर झुकाना कैसे सिखाऊँ तुझको
पत्थर दिलों की बस्ती में तू रहा है अब तक
हूँ मोम दिल, यकीं मैं कैसे दिलाऊँ तुझको
करनी ख़लिश है कोशिश, ज्यों फ़र्ज़ है ये मेरा
कडुवाहटों से शीरीं लब तक मैं लाऊँ तुझको.
बहर --- २२१२ १२२ // २२१२ १२२
महेश चन्द्र गुप्त ’ख़लिश’
१४ जुलाई २०१७