६११३. ये मत कहो अब प्यार है हमसे रहा नहीं – ७ जुलाई २०१७
ये मत कहो अब प्यार है हमसे रहा नहीं
क्या आपके है वास्ते हमने किया नहीं
सब ख़्वाहिशें अपनी भुला दीं आपके लिए
है कौन सा ग़म आपकी ख़ातिर सहा नहीं
हम प्यार के हैं देवता कहते थे आप ही
अब आप कहते हैं कोई हमसे बुरा नहीं
है आपकी मर्ज़ी रखें रिश्ता या तोड़ दें
हमको तो आपसे रहा कोई गिला नहीं
इतना ही कहना है हमें बस आपसे ख़लिश
हमसा मिलेगा और कोई दूसरा नहीं.
बहर --- २२१२ २२१२ २२१२ १२
महेश चन्द्र गुप्त ’ख़लिश’
३ जुलाई २०१७