आजु खेलो री! जगद्गुरु संग होरी। आजु खेलो री...
युगल प्रेम रंग भरी पिचकारिन,
भक्त तन मन रंग बोरी।
नाचत गावत सुधि बिसरावत,
मन भावत छोरा छोरी।
पुनि पुनि राधे राधे कहि कहि,
करत विभोर स्वजन को री।
अलबेली सरकार की जय कहि,
मनहुँ चिढ़ावत पिय को री।
धनि अस रस बोरी होरी धनि,
धनि धनि धनि मनगढ़ को री।
HAPPY HOLI