इसी जन्नत में, जहन्नुम गुमां होता By Dr. Tara Singh

5 views
Skip to first unread message

swarg...@gmail.com

unread,
Jan 31, 2021, 4:29:41 AM1/31/21
to Hindi Forum

इक  तू  नहीं  साथ, गम  सारा  मेरे साथ है

आज  फ़िर  वही  दिन ,वही  जुल्मते-रात1 है

 

मौत  रहती  है  , जिंदगी  पर  घात  लगाये

हौसला,    मुस्ते-खाक2    का   बेबुनियाद  है

 

नजर  बंद  कर  देखती  हूँ जब तमशाये-दिल

दीखता ,  रूह3    से   कालिब4   आज़ाद   है

 

दो  दिन  की  सैर  में  तमाम हो जायेगा यह

गुलिस्तां,वक्त से कैसी शिकायत,कैसा फ़साद है

 

मैं  तो बस इतना जानती, बागे-आलम5 का जो

महबूब है, मैं उसका शागिर्द, वह मेरा उस्ताद है

 

 

1. खौफ़ना्क रात 2. मुट्ठी भर राख 3. आत्मा

4 .साँच  5. संसार

Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages