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आज़ादी की लड़ाई एक जज्बा थी, हृदय में उस जज्बे की धधकती आग देश को दुश्मनों से बचाने के लिए आज भी उतनी ही जरूरी है। समस्याए आज भी उतनी ही गंभीर हैं किन्तु उसका दृश्यमान रूप अलग है, आज देश के सबसे बड़े शत्रु हैं भ्रष्टाचार, देश द्रोह, समाज का विघटन, पर्यावरण का ह्रास, अकर्मण्यता, स्वार्थवाद ।
जज्बे की वो आग सदैव दिल में जलतों रहेगी तभी दुश्मन काबू में रहेंगे अन्यथा जैसे ही यह आग ठंडी होगी शत्रु हम पर हावी हो जावेगा । आरामदायक जिंदगी ने सोच विचार के दृष्टिकोण को बादल दिया है। सुविधाओं की अधिकताओं ने भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता के विचार को सुगम कर दिया है। आजादी पाने के लिए सहे गए कष्टों का कोई चिह्न अब दिमाग में नहीं है।
विशेष रूप से जितने भी सांसद, विधायक तथा पार्षद हैं, जिनके कंधों पर देश चलाने का उत्तरदायित्त्व है, उन्हे आजादी के परवानों के दर्द का एहसास होना बहुत जरूरी है। यह एहसास उन्हे सतर्क हो कर काम करने के लिए प्रेरित करेगा व एक ऐसा दृश्य उनको दे सकता है जो उनको भ्रष्टाचार व देश द्रोह जैसे अपराध करने से पहले एक बार झकझोरे । इस एहसास की अनुभूति करवाने के लिए सभी निर्वाचित विधि निर्माताओं को 24 घंटे सेल्यूलर जेल (काला पानी) में मूल स्वरूप में बिना किसी सुविधा के रखा जाये । यह अनुभव उन्हे सदा देश पर प्राण न्यौछावर करने वाले वीर सपूतों की याद दिलाती रहेगी।
सेनानियों ने जिन दुरूह परिस्थितियों में विदेशी शासन से संघर्ष किया, जिन असह्य पीड़ाओं को झेला हमारे विधि निर्माताओं को उनकी एक झलक अवश्य मिलनी चाहिए। यह एक दिन का कष्टपूर्ण प्रवास उनके मन मस्तिष्क में उस संघर्ष की याद व राष्ट्रवाद की की ज्वाला को सदैव ताज़ा रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है जिसमें लाखों लोगों न अपना जीवन स्वाह किया और तब जाकर हमें आज़ादी का सूरज दिखा। यह याद विधि निर्माताओं के हृदय में देश भक्ति की लौ को जलाए रखने में मदद करेगा और करोड़ों लोगों की सेवा करने के लिए भाव को और सुदृढ़ करेगा।
विचारार्थ प्रस्तुत।