PMOPG/E/2026/0180621
ऐसा समझा जा रहा है कि IRDAI ने आम जनता से बीमा कंपनियों से संबंधित सुझाव एवं अनुभव आमंत्रित किए हैं। इस संबंध में मेरा एक व्यक्तिगत अनुभव है, जिसे मैं आपके विचारार्थ प्रस्तुत करना चाहता हूँ।
वर्तमान में लागू नियमों के अनुसार संभवतः बीमा कंपनी के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य नहीं है कि बीमा पॉलिसी का दस्तावेज ग्राहक को वास्तव में प्राप्त हुआ है। बीमा कंपनी द्वारा पॉलिसी जारी कर देने के बाद उसकी प्रति ग्राहक तक पहुँची या नहीं, इसकी जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निर्धारित प्रतीत नहीं होती।
आज कई राष्ट्रीय स्तर की बीमा योजनाएँ, जैसे प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (तथा प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, व्यापक रूप से प्रचलित हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत प्रीमियम की राशि ग्राहक के बैंक खाते से स्वतः काट ली जाती है। इसके बावजूद कई बार ग्राहक को पॉलिसी/बीमा प्रमाणपत्र की कोई प्रति उपलब्ध नहीं कराई जाती।
जब ग्राहक बीमा कंपनी से पॉलिसी की प्रति प्राप्त करने का प्रयास करता है, तो उसे वेबसाइट पर जाकर बैंक खाते से संबंधित विवरण, PAN, पॉलिसी संख्या आदि दर्ज करके स्वयं पॉलिसी डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। मेरा विचार है कि ग्राहक पर इस प्रकार की प्रक्रिया का दायित्व डालना उचित नहीं है, विशेषकर उन मामलों में जहाँ प्रीमियम स्वतः बैंक खाते से काटा गया हो।
व्यावहारिक कठिनाई यह भी है कि कुछ बीमा कंपनियों की वेबसाइट पर आवश्यक जानकारी प्राप्त करना हमेशा संभव नहीं होता। उदाहरण के लिए, National Insurance Company Limited की वेबसाइट अधिकांश अधिकांशतः सुचारु रूप से काम नहीं करती। ऐसी स्थिति में ग्राहक को अनावश्यक परेशानी होती है और उसे यह भी पता नहीं चल पाता कि उसके नाम पर वास्तव में कौन-सी पॉलिसी सक्रिय है तथा उसका कवरेज क्या है। अगर बीमा धारक के कब्जे में प्रमाण पत्र नहीं है तो उसका क्या लाभ, पॉलिसी धारक की मृत्यु होने की अवस्था में उसके परिवार को कैसे पता चलेगा?
अतः मेरा सुझाव है कि बीमा कंपनी के लिए यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि पॉलिसी जारी होने के बाद उसकी एक प्रति अथवा बीमा प्रमाणपत्र ग्राहक को स्वतः उपलब्ध कराया जाए—या तो ई-मेल के माध्यम से अथवा, जहाँ ई-मेल उपलब्ध न हो, भौतिक रूप से। साथ ही, ग्राहक के बैंक खाते से प्रीमियम की राशि कटने के बाद उसे SMS/ई-मेल के माध्यम से पॉलिसी संख्या, बीमित राशि, अवधि तथा पॉलिसी दस्तावेज प्राप्त करने की स्पष्ट जानकारी भी दी जानी चाहिए।
इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ग्राहक को यह सुनिश्चित करने में भी सुविधा होगी कि उसके खाते से काटी गई राशि के बदले वास्तविक बीमा कवर सक्रिय है।