आदरणीय शास्त्री जी का कहना है, हिन्दी के नए शब्द गढे जाने चाहिए, इसके बजाये कि हम अंग्रेजी के शब्द उपयोग में लाये. गढ़ने तक मैं सहमत हू. लेकिन उपयोग और प्रयोग एक निजी मामला है. किसी और कड़ी में न जाकर इस कड़ी में अपनी राय या विचार प्रकट करे. मैं किसी भी भाषा को नदी के माफिक मानता हू, जो अपना रास्ता ख़ुद तय करती है.
ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में हर साल हरेक भाषा से कई ऐसे शब्द जोड़े जाते हैं. हिन्दी का आलू और टोपी आज इंग्लिश डिक्शनरी का हिस्सा है.
हम भारतीय इंग्लिश से इतना क्यों खौफ खाते हैं?? ऐसा क्यों लगता है कि इंग्लिश पीपल का पेड़ है जो अपने सामने किसी और को उगने नही देगा?
इस कड़ी में हम बात कर सकते हैं. देबू दा कुछ नही कहेगे.
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Rajesh Roshan
http://rajeshroshan.com
मैंने डिक्शनरी को शब्दकोष नही कहा, मुझे कोई कहे शब्दकोष कहना चाहिए डिक्शनरी नही. तब मुझे लगता है की लोगो को अंग्रेजी से डर लगने लगा है. आज से २०० साल बाद मौसी शब्द का क्या मायने रहेंगे मुझे नही पता. इसलिए क्योंकि तब हम दो और हमारे एक के लिए सरकार को प्रचार नही करना पड़ेगा. दो बहने नही होंगी. मौसी शब्द लुप्त होता चला जाएगा.
प्रिय राजेश, (एवं अन्य मित्रगण)
मैंने डिक्शनरी को शब्दकोष नही कहा, मुझे कोई कहे शब्दकोष कहना चाहिए डिक्शनरी नही. तब मुझे लगता है की लोगो को अंग्रेजी से डर लगने लगा है. आज से २०० साल बाद मौसी शब्द का क्या मायने रहेंगे मुझे नही पता. इसलिए क्योंकि तब हम दो और हमारे एक के लिए सरकार को प्रचार नही करना पड़ेगा. दो बहने नही होंगी. मौसी शब्द लुप्त होता चला जाएगा.
भाषा अपने हिसाब और समय के साथ चलती है एपी और हम जरुर उसमे थोड़ा फेर बदल कर सकते हैं लेकिन.... जालोपलब्ध जैसे शब्द नही चल पाएंगे. प्रभाश जोशी जी का अपन जब नही चल पाया तो जालोपलब्ध जैसे शब्द कैसे चलेंगे. अपन शब्द बुंदेलखंड का हिस्सा था और वही रह गया. चलन में नही आ पाया. आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इतनी बड़ी मीडिया जब ऐसे शब्द को गढ़ने में पिछड गई फ़िर.....-----------------------------------पंकज जी फ़िर हमलोगों को लैटिन कि पढ़ाई पढ़नी होगी. अंग्रजी के कई सारे शब्द लैटिन से लिए गए हैं. मूल तो है ही नही ...
बेसिरपैर, आपकी राय में। कृपया "मेरी राय में बेसिरपैर" कहें, सिर्फ़
"बेसिरपैर" नहीं।
मेरी राय में शब्दों का प्रचलन प्रयोक्ताओं से होता है, सरकार या शब्दकोष
निर्माताओं से नहीं।
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Can't see Hindi? http://devanaagarii.net
प्रिय पंकज
यहां किसी ने यह नहीं कहा कि "हर" शब्द का हिन्दीकरणहोना चाहिये. बल्कि जो कहा गया उसका सार निम्न है:1. किसी ने आनलाईन के लिये हिन्दी सुझाने को कहा, एवंमैं ने एक सटीक शब्द सुझाया. आगे वे उपयोग करना चाहेय न चाहें यह उनके ऊपर है.2. हिन्दी का कोई भी हितैषी "सर्वत्र" हिन्दीकरण की बात नहीं,बल्कि "जहां तक हो सके" हिन्दी की उपेक्षा न करें की बातकरता है.3. अंग्रेजी से हमारा किसी भी तरह बैर नहीं है, लेकिन"अनावश्यक" अंग्रेजीकरण से जरूर बैर है.4. अंग्रेजी की तुलना में हिन्दी को निम्न स्थान दिये जानेसे भी बैर है एवं उसका नखशिखांत विरोध करते हैं.सस्नेहशास्त्री जे सी फिलिपहिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
http://www.Sarathi.info