चिट्ठा विश्व http://www.myjavaserver.com/~hindi/ पूर्णतः हैंडब्लेंडेड
जावा कोड पर आधारित था, इसमें किसी विजेट या बने बनाये कोड का प्रयोग
नहीं किया गया (नहीं हो सकता था)। डेटा रखने हेतु इसमें किसी प्रकार के
डेटाबेस का नहीं बल्कि रिसोर्ज़ बंडल का प्रयोग किया गया। माईजावासर्वर
तथा ब्लॉगडिग्गर की मुफ्त सुविधा पर निर्भर ये सेवा ज़ाहिर तौर पर धीमी
थी। नारद के जन्म के बाद ये ठप्प सा पड़ गया और फिर माईजावासर्वर की कृपा
से बंद। इसमें चिट्ठाकारों के प्रोफाईल, ब्लॉगजगत के आँकड़ें, रोचक तथ्य
और टैगक्लाउड जैसी सुविधायें थीँ। नेपाली, मराठी व गुजराती जैसी अन्य
भारतीय भाषाओं को जोड़ने की योजना भी थी। विगत एक साल से ये जालस्थल बंद
था क्योंकि जावालॉबी ने इस मुफ्त सेवा को सड़ने के लिये छोड़ रखा था, किसी
नेकदिल ने शायद पुनः पैबंद लगा कर इसे चालू कर दिया। साईडबार पर लगे
चिट्ठों की सूची में पहले सभी चिट्ठों के नाम होते थे, जिसे चिट्ठों की
लगातार बढ़ती संख्या के कारण अब कर पाना असंभव है। ये सूची अविनाश के
मुहल्ला पर काफी दिन चलती भी रही, माईजावासर्वर पर कुछ कंपाईल्ड जेएसपी
भली भाँति चल जाया करती थीं।
माईजावासर्वर के पुनः शुरु होने की खबर मुझे अप्रत्यक्ष रूप से मीनाक्षी
से मिली जिन्होंने "शब्दनिधी" http://shabdnidhi.debashish.com की
प्रशंसा की। माईजावासर्वर पर ही स्थापित शब्दनिधी भी काफी दिनों से काम
नहीं करती थी।
चिट्ठाविश्व को दुबारा चालू करने की मेरी कोई योजना नहीं है। ये अद्यतन
नहीं होता अतः इसमें जोड़ने के लिये अपनी साईटें न भेजें। इस खत का
उद्देश्य केवल रुचि रखने वाले मित्रों को ये बताना था कि चिट्ठा विश्व
कैसा दिखता था ये इस साईट से जीवंत रूप में देख सकते हैं। इस नाते ये बस
अब एक संग्रहालय में रखा एक डिस्पले भर है :)
आपका
देबाशीष
If u can't beat them, join them.
ePandit: http://epandit.blogspot.com/