पीनियल ग्रंथि(Third Eye)Part-- क्रोध करना , निंदा करना कमजोर मन की निशानी है - 🌞 *विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति* 🌞
पीनियल ग्रंथि(Third Eye)Part-5
पीनियल ग्रन्थि आत्मा का अकाल तख्त है ।
सवाल पैदा होता है कि पीनियल ग्रंथि स्थूल है और आत्मा सूक्ष्म है तो वह इसमें रुकी हुई कैसे है ।
हमारा शरीर कोशिकाओं से बना है ।हर कोशिका के दो छोर होते है। एक छोर से पॉज़िटिव चुम्बकीय बल पैदा हो रहा है तथा दूसरे छोर से नेगेटिव चुम्बकीय बल पैदा हो रहा है।एक सूक्ष्म तार के द्वारा सारे नेगेटिव सिरे एक साइड से तथा दूसरी साइड से पॉज़िटिव सिरे पीनियल ग्रन्थि से जुड़ते है।इन दोनो सिरों के बीच में,पीनियल ग्रंथि के अन्दर, सूक्ष्म चुम्बकीय बल पैदा होता है । दोनो बल एक दूसरे को खींचते है । बस यहां इस बल के बीच में आत्मा सूक्ष्म होते भी स्थूल शरीर में रुकी रहती है ।
जब किसी कारण से शरीर में चोट या बीमारी आदि से एक साइड का चुम्बकीय बल टूट जाता है तो आत्मा उड़ जाती है जिसे हम मृत्यु कहते है ।
आत्मा हर समय गोल-गोल घूमती रहती है ।
हर सूचना आत्मा के अलग-अलग क्षेत्रों में रेकोर्ड होती रहती है ।
शरीर की सारी कोशिकाये एवं सारे मुख्य अंग नेगेटिव और पॉज़िटिव चुम्बकीय बल पैदा करने वाली नसो से जुड़ी होती है।
शरीर के किसी भी भाग से सम्बन्धित सूचनायें यहां पहुँचती है और आत्मा के अलग अलग भागों में जा कर रेकार्ड हो जाती है । जब वह सूचना दुबारा चाहिये तो जो अन्दर चुम्बकीय बल बन रहा है, वह दोनो चुम्बीय नसें आत्मा को घुमाती है जिससे सूचना आत्मा के जिस क्षेत्र में पड़ी है उन्हे पढ़ लेती है ।
जब जीवन में बुरी चीजें ज्यादा आ जाती है तो दोनो नसें जिनसे चुम्बकीय बल बनता है वह कमजोर हो जाता है जिससे हम डाटा रीड नही कर पाते जिसे हम कह देते है याददाश्त कम हो गयी है।
उम्र बढ़ने के साथ यह चुम्बकीय बल कम हो जाता है जिस से आत्मा रोटेट नही होती और पुरानी चीजें याद नही आती जिसे हम कहते है कि यह बूढ़ा हो गया है । साठ लगी लाठ या रतरे बतरे हो गया है, जैसी कहावतें कहने लगते है ।
बुढ़ापे के कारण, बीमारी के कारण, कमजोरी के कारण या एक्सिडेंट आदि के कारण एक साइड का चुम्बकीय बल ख़त्म हो जाता है जिस से आत्मा शरीर में नही रहती जिसे मृत्यु कहते है ।
हम जो कुछ सोचते,बोलते,करते वा देखते है वह सब आत्मा में रिकार्ड होता रहता है। यह रिकॉर्डिंग अणु लेवल पर होती है ।
मान लो हम एक चाय से भरा कप देखते है। देखते ही मन इसे छोटा से छोटा बनाता है।इसे एक ग्राम जितना छोटा बना देता है फ़िर उस ग्राम के एक लाख टुकड़े कर देता है । ये जो लाखवा टुकड़ा है इसे दिमाग में रेकॉर्ड करता है फ़िर जब इसे पूर्ण रुप में देखना हो तो इस का रुप इनक्रीज कर देता है । यह सारा कार्य एक सेकेंड से कम समय में हो जाता है ।
ये रिकॉर्डिंग चिन्हों में करता है ।ये चिन्ह दिमाग अपने आप बना लेता है । इसलिये इशारो की भाषा सभी समझते है ।
यह सब पीनियल ग्रंथि के अन्दर दिमाग के भिन्न-भिन्नि भागों द्वारा घटित होता है ।
मरने के बाद आत्मा दूसरा जन्म लें लेती है ।
ओम शान्ति
पुरुषार्थ
🌷पुरुषार्थ दिल
से करने से पुरुषार्थ करने में मज़ा आता है।वही पुरुषार्थ बासा हो जाता है मज़ा आना बंद हो जाता है फिर
पृरषार्थ बदला जाता है नवीनता के लिये।वही पुरुषार्थ दिल से किया जाये, प्यार
से किया जाए तो लंबे समय तक जब तक उससे प्राप्तियां न निकलने लगे तब तक किया जा सकता है।*
*🌷दिल से
पुरुषार्थ करने के लिए बाबा को दिल तख्त पर बिठाना होता है और बाकी सबको दिल तकगत
से उतारना होता है।*
*💞
🌷
💕दिल मे कौन
बैठते हैं?*
*🌷जिनसे सतोप्रधान
,पवित्र और हिसाब किताब मुक्त रिश्ते होते हैं।*
*🌷हिसाब किताब स्वतः ही रिश्तों को दिल तख्त से उतार रजोप्रधान रिश्तों
में परिवर्तन कर देता है।*
*🌷नित नवीन प्राप्तियों के लिये कोई भी पुरुषार्थ हो दिल से हो तो
प्राप्ति मय होगा।*
*🌷ओम् शांति
🌷*
क्रोध करना , निंदा करना कमजोर मन की निशानी है।
आपका खुद के लिये एक दृढ संकल्प की
," मैं एक शांतस्वरुप , आनंदस्वरुप ,शक्तिस्वरुप आत्मा हूँ और मेरे सुख दुख के लिये मेरे ही पिछले कर्म जिम्मेदार है। "
यह ज्ञान आपके मन को किसी भी परिस्तिथि में भटकने नही देगा । मन को शक्तिशाली बना देगा।
ओम् शान्ति
🇲🇰💎 *ETW - 22-05-17* 💎🇲🇰
🌞 *विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति* 🌞
1. स्वमान - मैं कल्पवृक्ष का मास्टर बीजरुप हूँ।
- जैसे बाबा कल्पवृक्ष के बीज हैं और सारे कल्पवृक्ष का विस्तार उनमें समाया हुआ है...फिर भी बाबा हमेशा सार स्वरुप में रहते हैं...वैसे ही मैं भी कल्पवृक्ष का मास्टर बीजरुप हूं...मैं सृष्टि के आदि, मध्य, अंत का सिमरण करते हुए अपने सार स्वरुप बीजरुप स्थिति में स्थित रहता हूँ...।
2.योगाभ्यास -
अ. मैं मन का मालिक हं...राजा हूँ...मैं जब चाहूं सेवा वा स्वउन्नति के लिये विचारों को विस्तार दूँ और जब चाहूँ तब अपने विचारों को कछुए की तरह संकीर्ण कर लूँ...इसका अभ्यास बढ़ाते चलें... ।
ब. सारे दिन में तीन बिंदियों (आत्मा, परमात्मा और ड्रामा) का कम से कम 10 बार अभ्यास करें...।
स. आत्मा देखने से विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति बढ़ती है तो आत्मिक दृष्टि का अभ्यास करें...संबंध-संपर्क में आने वाले सभी लागों को आत्मिक दृष्टि से देखें और व्यवहार करें...।
3. धारणा - बड़ी बात को छोटा करना
कईयों की आदत होती है छोटी बात को बड़ा करने की। यह आदत बड़ी घातक है। इससे समय, संकल्प, एनर्जी सब वेस्ट होता है। इसलिये राई को पहाड़ ना बनायें, बल्कि पहाड़ को राई और राई को रुई बनाने का संस्कार स्वयं में विकसित करें।
4. चिंतन -
- विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति से क्या अभिप्राय है?
- विस्तार को संकीर्ण करने की आवश्यकता एवं महत्ता?
- विस्तार को संकीर्ण कैसे करें? क्या अभ्यास करें??
- विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति के लिए बाबा के महावाक्य?
5. स्वराज्याधिकारियों प्रति - प्रिय स्वराज्याधिकारियों! प्रारंभ से हम सबने अपने हर चार्ट में ‘ दिनचर्या और योग को शामिल किया है। इसका कारण ये है कि हमारी दिनचर्या हमारी सम्पन्नता व सम्पूर्णता की प्रथम सीढ़ी है, नींव है। यदि यही कमजोर रहा तो सम्पूर्णता हमारे लिये स्वप्न बन जाएगा। बाबा ने कहा है – “दिनचर्या में उढपर-नीचे होना (अनियमितता) भी अपवित्रता है।“ इसलिये इसे हम पक्का भी करें और इसमें गहराई भी लाते जायें। साथ ही जब योग पर हमारा ध्यान होता है तो सर्व शक्तियाँ हमारे अंदर आती जाती हैं। चाहे वो सामना करने की शक्ति हो या विस्तार को संकीर्ण करने की। अत अपने योग के चार्ट को भी बढ़ाते चलें।
*पानी और भोजन चार्ज करना*
पानी और food को चार्ज करने के लिए हमें कुछ पॉजिटिव संकल्प और श्रेष्ठ स्वमान में स्थित होना होता हैं क्योंकि जैसे हमारे संकल्प होते हैं वैसे ही पानी और भोजन में जाते हैं।जिस भी पानी या खाने को आपको चार्ज करना हैं तो 7 बार संकल्प करे।मैं परम पवित्र आत्मा हूँ पवित्रता के सागर शिवबाबा से पवित्र किरणे मुझ आत्मा में समा रही हैं और नयनों से और हाथों से पानी में जा रही हैं।या संकल्प करेंमैं मास्टर सर्वशक्तिमान हूँ मेरे नयनों से पवित्र किरणे भोजन मेंजा रही है।तो इससे पवित्र वाइब्रेशन पानी या भोजन में जाने लगेंगे।पानी में सबसे ज्यादा शक्ति होती हैं हमारे संकल्पो को ग्रहण करने की। तो जो भी हम संकल्प करते हैं वो तुरंत पानी ग्रहण करने लगता हैं। आप ये न सोचें कि पता नही वाइब्रेशन जा भी रहे हैं या नही ।लेकिन इस विधि को करते रहें। positive सोचे।
शाकाहारी बने और स्वस्थ रहे
अग्नि
पर जब फल, फुल अनाज, दूध,
दहीं, घी, तेल
डाला जाता है तो वो यज्ञ बन जाता है !!!*
*और....*
*उसी अग्नि पर जब मुर्दा, हड्डी, मांस का शरीर रखा जाता हे फिर वो पूरा
हो या कटा हुआ हो तो वो चिता बन जाती है !!!*
*हमें भी जब भूख लगती हे तो कहा जाता हे की हमारे भीतर जठराग्नि प्रज्जवलित
हुई है और वो भी अग्नि है और जब ये जठराग्नि प्रज्जवलित होती हे तब
हम उस में भी कुछ ना कुछ डालते है ।*
*अगर*
*हम उस में चिकन, मटन या मांस का कुछ भी डालते हे तो वो चिता बन जाती है और*
*अगर हम उसमे फल, फुल, अनाज,
दूध, दहीं, घी, तेल डालते हे तो वो यज्ञ बन जाता है
!!*
*अब आप के भीतर चिता हो या यज्ञ यह निर्णय आप को करना है !!!*!!!*
55 वर्ष से अधिक उम्र वाले इस सन्देश को सावधानी पूर्वक पढ़ें*, क्योंकि यह उनके आने वाले जीवन के लिए अत्यन्त ही महत्व पूर्ण :
*सुखमय वृद्धावस्था *
*1* 🏠 *अपने स्वयं के स्थायी स्थान पर रहें ताकि स्वतंत्र जीवन जीने का आनंद ले सकें!*
*2*💵 *अपना बैंक बेलेंस और भौतिक संपत्ति अपने पास रखें! अति प्रेम में पड़कर किसी के नाम करने की ना सोचें।*
*3* *अपने बच्चों के इस वादे पर निर्भर ना रहें कि वो वृद्धावस्था में आपकी सेवा करेंगे, क्योंकि समय बदलने के साथ उनकी प्राथमिकता भी बदल जाती है और कभी कभी चाहते हुए भी वे कुछ नहीं कर पाते* 👬
*4*👥 *उन लोगों को अपने मित्र समूह में शामिल रखें जो आपके जीवन को प्रसन्न देखना चाहते हैं , यानी सच्चे हितैषी हों।* 🙏
*5* 🙌 *किसी के साथ अपनी तुलना ना करें और ना ही किसी से कोई उम्मीद रखें!*
*6* 👫 *अपनी संतानों के जीवन में दखल अन्दाजी ना करें, उन्हें अपने तरीके से अपना जीवन जीने दें और आप अपने तरीके से अपना जीवन जीएँ!*
*7* 👳 *अपनी वृद्धावस्था को आधार बनाकर किसी से सेवा करवाने, सम्मान पाने का प्रयास कभी ना करें।*
*8* 🖐 *लोगों की बातें सुनें लेकिन अपने स्वतंत्र विचारों के आधार पर निर्णय लें।*
*9*👏 * अगर भगवान से कुछ मांगे तो सिर्फ माफ़ी और हिम्मत!*
*10* 💪 *अपने स्वास्थ्य का स्वयं ध्यान रखें, चिकित्सीय परीक्षण के अलावा अपने आर्थिक सामर्थ्य अनुसार अच्छा पौष्टिक भोजन खाएं और यथा सम्भव अपना काम अपने हाथों से करें! छोटे कष्टों पर ध्यान ना दें, उम्र के साथ छोटी मोटी शारीरिक परेशानीयां चलती रहती हैं।*
*11* 😎 *अपने जीवन को उल्लास से जीने का प्रयत्न करें खुद प्रसन्न रहने की चेष्टा करें और दूसरों को प्रसन्न रखें।*
*12* 💏 *प्रति वर्ष अपने जीवन साथी केे साथ भ्रमण/ छोटी यात्रा पर एक या अधिक बार अवश्य जाएं, इससे आपका जीने का नजरिया बदलेगा!*
*13* 😖 *किसी भी टकराव को टालें एवं तनाव रहित जीवन जिऐं!*
*14* 😫 *जीवन में स्थायी कुछ भी नहीं है चिंताएं भी नहीं इस बात का विश्वास करें !*
*15* 😃 *अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को रिटायरमेंट तक पूरा कर लें, याद रखें जब तक आप अपने लिए जीना शुरू नहीं करते हैं तब तक आप जीवित नहीं हैं!
😀 *खुशनुमा जीवन की शुभकामनाओं के साथ*