t0YiY *ज्योतिष लक्ष्मी: Jyotish Astrology [PDF/EPub] Book by पंडित श्री विजय प्रकाश शर्मा ‘वत्स’

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Synopsis: सरल-सुगम भाषा -शैली में गूढ़ रहस्यों कोसमझाने वाली ज्योतिष की एक उत्कृष्ट कृतिइस पुस्तक की रचना करने में मुझे स्वतः अपने गुरू स्वः पं. केशवदत्त शास्त्री का स्मरण रहता रहा व मेरे प्रेरणा स्रोत रहे व श्रद्धेय पं. जगदीश प्रसाद जी ऋषिकेश द्वारा समस्या समाधान व प्रोत्साहन मिलता रहा है। मैं आजीवन उनका आभारी रहूंगा। इसमें मेरी धर्मपत्नी ‘कृष्णा’ का सहयोग और समय-समय पर उपयुक्त राय से अनुग्रहित करके मेरा हौसला बढ़ाया व यह पुस्तक लिखने के लिए प्रेरित किया। अन्त में मेरी बेटी डॉ. नीतिका वत्स दूहन ने हर कदम पर मुझे इस पुस्तक के लिखने में आगे और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर व इसे छपवाने व अशुद्धियाँ दूर करने में मेरी मदद की है। मैं उसे शुभाशीर्वाद देता हूँ तथा आप सभी विद्वान, गुणीजनों का इस विद्या को आगे बढ़ाने में सहयोग की अपेक्षा करता हूँ।इस पुस्तक के ज्ञान भण्डार में या प्रकाशन में कोई कमी रह गई हो तो मुझे बिल्कुल क्षमा नहीं करना बल्कि मेरी भर्त्सना करना, मुझे बताना कि यहां-यहां गलतियाँ माफी के काबिल नहीं हैं ताकि मैं आपका कृतज्ञ रहूँ। इतना अवश्य है कि इस पुस्तक को ज्यादा मोटा व स्थूल बनाया जा सकता था, इसमें और विषय भी भरे जा सकते थे परन्तु व्यवहारिकता को देखते हुए इसे उपयुक्त समझा गया तथा व्यर्थ भार बढ़ाने से तो पुस्तक की महत्ता नहीं बढ़ती। इसलिये इसका अगला संस्करण जो शीघ्र ही आपके हाथों में होगा उसमें परिवर्तन के साथ विषय ज्यादा लिए जाएंगे और स्नातक स्तर का प्रयास होगा।हजारों साल से हमारे ऋषि मुनियों, ब्राह्मण सन्यासियों ने अपनी तपस्या, मनोबल के विकास एवं अध्यात्मिक विकास के बल पर छः हों शास्त्र (शिक्षा, व्याकरण, निरूक्त ज्योतिष, कल्प व छन्द) का जो ज्ञान भण्डार संसार को दिया है वह अतुलनीय है। इस ज्ञान की कोई सीमा भी नहीं हैं। वे लोग निस्वार्थ भाव से शिक्षा प्रदान करते थे, धन संचय को पाप मानते थे और भिक्षा से अपना जीवन यापन करते थे। इसी कारण विदेशों से जितने भी सैलानी आए उन सभी ने भारत के ज्ञान विज्ञान की बेजोड़ प्रशंसा की व धर्म ग्रंथों में बखान किया।इस विद्या का महत्व जानना केवल उन्हीं व्यक्तियों पर आश्रित है जो इस बारे में जानते हैं। एक वैद्य बीमार से बीसियों सवाल पूछने व जीभ आंख नाड़ी पेशाब आदि देखने के बाद भी कई बार असफल हो जाता है। लेकिन एक ज्योतिषी जिसने जातक को देखा तक नहीं, जिसका जन्म स्थान/समय नहीं मालूम, वह 80-85% सफल होता है, कारण इसके रचयिता हमारे निस्वार्थ धर्मगुरू ब्राह्मण थे। गर्ग, च्यवन, व्यास, जैमिनी, पराशर को कौन ज्योतिषी भूल सकता है। श्री रामचन्द्र जी के गुरू वशिष्ठ (पुरोहित) के बेटे ‘शक्ति’ व उसके बेटे ‘पराशर’ ज्योतिर्विद थे जिनके पुत्र ’व्यास’ जिन्होंने पुराण और महाभारत लिखी और इनके  शिष्य ‘जैमिनी’ जो जैमिनी सूत्र व फलित ज्योतिष के प्रारम्भिक रचयिता को कौन भूल सकता है। अतः ये शास्त्र असत्य कैसे हो सकता है। ये अवश्य है कि हम लोग संस्कृत ग्रंथों का पूर्ण सटीक रूपांतरण न करने के कारण कुछ अधूरे ज्योतिषी रहे।.
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