आज विश्व नृत्य दिवस पर स्वरांगी साने की कविताएँ

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Vijay K. Malhotra

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Apr 29, 2015, 2:34:02 AM4/29/15
to Hindishikshakbandu googlegroup, Ashok Chakradhar, Sanjay Bhardwaj, kailash budhwar, 富夫 .溝上, Sandhya Bhagat, vinay, Kiran Shete, Mahesh Kulkarni, Aditya Chaudhary, Suneeta Pandey, Rama Singh, Rishabha Deo Sharma, rosaiah konjeti, Ravi Kumar, Indian Translators Association, Priyanka Jain




http://asuvidha.blogspot.in/2015/04/blog-post_29.html


पुणे में रहने वाली स्वरांगी साने कला, संगीत, नृत्य और साहित्य में समान अभिरुचि रखती हैं. आज विश्व नृत्य दिवस पर उनकी इन कविताओं से गुज़रते हुए आप न नृत्य और उसकी भंगिमाओं के बहाने एक नृत्यांगना के जीवन में भी प्रवेश करते हैं. सम जैसी कविता जीवन की जटिलताओं के बीच ठहरने के लिए किसी सम की तलाश की एक अनूठी व्यंजना रचती है. 

नृत्य के नायिका भेद के लिहाज़ से आठ खण्डों में बंटी उनकी लम्बी कविता स्त्री जीवन के तमाम रंगों के कभी चमकीले तो कभी फ़ीके अक्सों से बनी है. इस तरह ये हिंदी कविता के स्त्री पक्ष को एक और ज़रूरी रंग देती हैं, ताब देती हैं. मेरे देखे इधर  नृत्य को केंद्र में रख कर लिखीं ये हिंदी की  इकलौती कविताएँ हैं. उम्मीद है पाठक इन्हें पढ़ते हुए एक अलग भावजगत तक जा पाएंगे. असुविधा पर स्वरांगी जी का स्वागत और उम्मीद कि आगे भी उनका सहयोग मिलता रहेगा.



विजय


विजय कुमार मल्होत्रा
पूर्व निदेशक (राजभाषा),
रेल मंत्रालय,भारत सरकार

Vijay K Malhotra
Former Director (OL),
Ministry of Railways,
Govt. of India
Mobile:91-9910029919
     


URL<www.vijaykmalhotra.mywebdunia.com>
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