🙏हिन्दी को अंग्रेजी की बधाई🙏
फोन उठाते ही दुसरी तरफ से आवाज आयी, हैलो....हिन्दी? इधर से बोली,हू आर यू? फिर उधर से जवाब आया जी , मैं अंग्रेजी बोल रही हूँ ,हिन्दी की दोस्त।उसे जन्मदिन की बधाई देनी है......आप कौन? इधर से खुशी का इजहार करते हुए वह बोली, हाउ आर यू इंग्लिश बेटा ? मैं हिन्दी की मम्मी। लगभग बीस मिनट तक हिन्दी की माँ ने फोन पर अंग्रेजी की तारीफ की। अंततः अंग्रेजी ही बोली, आन्टी जरा हिन्दी को बुला दीजिए ना। उन्होंने फोन मेज पर रखा और अपनी कर्कश आवाज में हिन्दी को आवाज लगा दी। हिन्दी तुरंत नीचे आयी और फोन का रिसीवर उठा कर मीठी आवाज में बोली ,अंग्रेजी !कैसी हो तुम??
अंग्रेजी बोली-मेरी छोड, अपनी बता....लेकिन पहले अपने दिवस की बधाई तो ले लो।
हिन्दी बोली-धन्यवाद!(फिर अंग्रेजी के अगले कुछ सवालों के जवाब में तो खामोश रही) फिर सिर्फ हूँ-हूँ करती रही। हूँ यानी हाँ और ना के बीच का जवाब।
(हिन्दी की खामोशी भापते हुए अंग्रेजी बोली) तबीयत तो ठीक है ना तुम्हारी??
हिन्दी बोली-हूँ - हूँ ,तबीयत पूछ कर मेरा मज़ाक उडा रही हो? तुम्हें तो पता ही है कि मेरी (हिन्दी की ) हालत कैसी है ? बस हिन्दी दिवस पर लोगों को याद आती हूॅ।बाकि दिन तो मैं अपने ही घर में परायी हूॅ।खुद को मेरा शुभचिंतक दिखाने के लिए,14 सितंबर को कुछ लोग फेसबुक-टूवीटर आदि पर फुसलाने वाली बातें लिखेंगे।कहीं-कहीं कार्यक्रम भी होंगे,जिसमें मेरे भविष्य को लेकर बडी-बडी बातें होंगी।इसके बाद फिर वही घर की मुर्गी दाल बराबर।इस से अच्छी तो मैं विदेश में हूॅ जो मेरे प्रति गहरी रुचि ले रहा है।खैर ये सब छोडो तुम्हें मेरे घर के लोग बहुत पसन्द करतें हैं।पता नहीं तुमने कौन-सा जादू चला रखा है?
(यह सुन कर अंग्रेजी आश्चर्यचकित होकर बोली)-
क्या बात करती हो तुम !मुझे तो लगा था कि अब तक तुम लोग मुझे भूल गये होगे। तुम्हारे दादा-परदादा तो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं करते थे।
हिन्दी बोली-अब ऐसा नहीं है। बल्कि मुझसे ज्यादा लोग तुम्हें पहचानते हैं। अभी कल की ही बात है,मैं ने रिक्शेवाले से पूछा-भइया,विश्वविद्यालय चलेंगे? उसने आश्चर्य से मुझे देखा और बोला-ये कहाॅ है मैडम? फिर मैंने जब अंग्रेजी में कहा कि यूनिवर्सिटी चलेंगे,तब वह बोलता है-अरे मैडम! हिन्दी में कहिए न कि यूनिवर्सिटी चलना है , चलिए बैठिए! एक और घटना बताती हूॅ।मेरी रेलगाडी विलम्ब थी,तो मैंने स्टेशन पर एक एक आदमी से पूछा कि भइया पूछताछ कार्यालय कहाॅ है ?उसने कहा, साँरी बहन जी मैं शहर में नया हूॅ,बगल में इंक्वायरी काउन्टर है, वहाॅ से पूछ लें...,..,...!
यह तो हाल है,इस देश में हिन्दी का सच कहूँ तो मैं अपने -ही घर के लोगों के लिए गले की हड्डी बनी हुई हूँ।इतना कहते -कहते हिन्दी का गला भर आया और उसने फोन काट दिया। फिर चेहरे पर नकली खुशी ओढ कर अखबारों में अपने दिवस के आयोजन की खबरें पढने लगी।
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