[4/27, 6:39 AM] Gurumurthy Kasinathan: वो दुश्मन बनकर ,
मुझे जीतने निकले थे..
मुहब्बत कर लेते ,
मै खुद ही हार जाता ...
[4/28, 6:04 PM] Gurumurthy Kasinathan: उर्दु के तीन मशहूर शायर --
ग़ालिब(1797 -1869)
इक़बाल(1877-1938)
फ़राज़(1931-2008)
शूरु गालिब ने किया ....
ज़ाहिद, शराब पीने दे
मस्जिद में बैठ कर ,
या वो जगह बता
जँहा खुदा नहीं .
इक्बाल को ये नामंजूर था . पचास साल बाद उनका जवाब....
मस्जिद खुदा का घर है
पीने की जगह नहीं ,
काफ़िर के दिल में जा
वहां खुदा नहीं .
फिर बाद पचास साल फराज के लब्ज ....
काफ़िर के दिल से आया हूँ
मैं ये देख कर फ़राज़ ,
खुदा मौजूद है वहाँ
पर उसे पता नहीं .
[4/28, 6:51 PM] +91 98447 73040:
कभी इधर ढूंढ़ता हूँ, तो कभी उधर ढूंढ़ता हूँ !
दिल की हर धड़कन, और कोनों में ढूंढता हूँ !
न मिला मुझे बीते कल का कोई भी लम्हां,
मैं कोई अतीत का, प्यारा सा अक्स ढूंढ़ता हूँ !
मैं भूल गया रख कर कहीं यादों की पोटली,
मैं अपने वचपन के, खेलों का आँगन ढूंढता हूँ !
ऊब सा गया हूँ मैं ये कोंन सी उम्र है “मिश्र”,
कि मैं खुद में क्यों, जवानी कि धमक ढूंढ़ता हूँ !
शांती स्वरूप मिश्र