POEM LIKH RAHA HUN

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SUNIL PARIT

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Apr 10, 2016, 1:58:38 AM4/10/16
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आज की मेरी कविता

लिख रहा हूँ (गजल)

मैं भारत माँ को लिख रहा हूँ
मैं जग का अभिमत लिख रहा हूँ॥

जरा गौर कीजिए जनाब यहाँ
मैं देश का गीत लिख रहा हूँ॥

कोई सुने या ना सुने यहाँ
मैं दिल की बात लिख रहा हूँ॥

माँ का एक सच्चा सपूत हूँ
मैं मन का मीत लिख रहा हूँ॥

भारत संस्कृति जो विश्वगुरु है
मैं उसकी अहमियत लिख रहा हूँ॥

प्रणाम उन श्रमिक किसानों को
मैं उनका जज्बात लिख रहा हूँ॥

दीनदलितों को न्याय दिलाओ
मैं उनकी हालत लिख रहा हूँ॥

आँख उठाकर जो देखे माँ को
मैं उनकी औकात लिख रहा हूँ॥

सलाम उन वीर जवानों को
मैं उनकी सौगात लिख रहा हूँ॥

नतमस्तक हूँ माँ के चरणो में
मैं माँ का वृत्तांत लिख रहा हूँ॥

डॉ. सुनील कुमार परीट, बेलगांव, कर्नाटक 08867417505

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